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दुनिया

मोदी चले अमेरिका

भारतीय प्रधानमंत्री शुक्रवार सुबह अमेरिका पहुंच रहे हैं. मोदी की कोशिश कॉरपोरेट घरानों के बड़े बड़े सीईओ को आकर्षित करने और निवेश केंद्रित कूटनीति की है. साथ ही अपनी निजी जीत का इजहार करने का भी मौका है.

अमेरिका के न्यूयॉर्क में दो दिन बिताने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वॉशिंगटन के लिए रवाना होंगे जहां उनकी पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात होगी. ओबामा भारत और अमेरिका के रिश्तों को '21वीं सदी के निर्धारक साझेदारों में से एक' करार दे चुके हैं. घरेलू सुधार कार्यक्रम चलाने के लिए मोदी चीन और जापान जैसे सुपर पावर से 55 अरब डॉलर के निवेश वचन मनवा चुके हैं. मोदी ने हाल ही में जापान और चीन के नेताओं से मुलाकात की. लेकिन इस तरह की कोई दरियादिली वॉशिंगटन में देखने को नहीं मिलेगी और मोदी इस बात को मानते हैं कि अमेरिकी के निजी क्षेत्र का दिल उन्हें जीतना होगा.

निवेशकों को लुभा पाएंगे?

मोदी अमेरिकी यात्रा के दौरान 17 कॉरपोरेट प्रमुखों से मुलाकात करेंगे जिनमें गूगल, आईबीएम, जीई, गोल्डमैन सैक्स और बोइंग शामिल हैं. सुबह के नाश्ते के दौरान वह बिजनेस प्रमुखों से मुलाकात करेंगे, जहां वह कुछ नहीं खाएंगे क्योंकि वह नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं. रेड टेप को रेड कार्पेट में तब्दील करने का वादा करने वाले मोदी से निवेशक कितने सहमत हो पाते हैं यह देखना होगा. वर्ल्ड बैंक की दुनिया में आसानी से बिजनेस करने वाली सूची में भारत का नंबर तीन पायदान से खिसक कर 134वें स्थान पर पहुंच गया है.

यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल के कार्यवाहक अध्यक्ष डायने फारैल के मुताबिक, "लोग बेताब हैं क्योंकि वे देखना चाहते हैं कि भारत एक बार फिर से विकास में तेजी लाए. लेकिन यह विमान को मोड़ने की कोशिश करने की तरह है. इसमें समय लगता है और यह काम मिनटों में होने वाला नहीं है."

मोदी की 100 घंटे की यात्रा के दौरान 35 कार्यक्रम होने हैं, जिनमें न्यूयॉर्क के मेडिसन स्कैवयर में भाषण भी शामिल है. मेडिसन स्कैवयर गार्डन में रविवार को मोदी भाषण देने वाले हैं और इसमें 18,000 से ज्यादा लोगों के जमा होने की संभावना व्यक्त की गई है. हजारों लोग न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कैवयर पर लगे स्क्रीन पर इसे देखने के लिए जमा होंगे. इसके अलावा मोदी संयुक्त राष्ट्र में भाषण भी देंगे. मोदी अमेरिकी राजनीति के प्रमुख चेहरों से मुलाकात करेंगे, इनमें कांग्रेस के नेता और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन भी शामिल हैं. ऐसा माना जाता है कि हिलेरी क्लिंटन 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में बतौर उम्मीदवार खड़ी हो सकती हैं.

ओबामा प्रशासन भारत को न सिर्फ ऐसे देश के तौर देखता है जहां विस्तारित व्यवसाय और व्यापार के लिए विशाल क्षमता है लेकिन उसे एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर भी देखता है जो तेजी से मुखर होते चीन को जवाब देने का माद्दा रखता है. पिछले दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की यात्रा की थी. अमेरिकी अधिकारी ऐसे सुझाव को कम करके देख रहे हैं जो कह रहे हैं कि मोदी की यात्रा से नाटकीय सफलता मिलेगी, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि रिश्ते पुनर्जीवित करने के लिए यह ठीक होगा. खास कर के उन्हें उम्मीद है कि रक्षा संबंधों को सह उत्पादन और सह विकास उपक्रम के माध्यम से विस्तार मिलेगा. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक रक्षा, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में उसे ठोस परिणामों की उम्मीद है. अमेरिका में व्यापार और राजनीति जगत के लोगों से जिस का अभिवादन मोदी को मिलेगा वह ध्यान आकर्षित करने वाला है और शायद संतोषजनक भी. क्योंकि 2002 के गुजरात दंगों के बाद उन्हें 2005 में अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया था. इन दंगों में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर मुसलमान शामिल थे. मोदी की यात्रा के दौरान कुछ विरोध प्रदर्शन की भी आशंका है.

एए/एजेए (रॉयटर्स)

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