मोदी को अमेरिकी वीजा न देने की सिफारिश | दुनिया | DW | 04.12.2012
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दुनिया

मोदी को अमेरिकी वीजा न देने की सिफारिश

अमेरिका 10 साल पहले के गुजरात दंगों में फंसे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का बायकॉट जारी रखना चाहता है. अमेरिकी कांग्रेस के 25 सदस्यों ने सिफारिश की है कि नया प्रशासन भी मोदी को वीजा न देने के रुख पर कायम रहे.

इन सदस्यों ने अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से कहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2002 के गुजरात दंगों को सही ढंग से नहीं देखा और इसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री ही हैं.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 25 सांसदों ने जो चिट्ठी लिखी है, उसमें कहा गया है, "नरेंद्र मोदी ऊंचे पद (प्रधानमंत्री) के लिए लगातार प्रयासरत हैं, हम समझते हैं कि उनके वीजा के आवेदन पर किसी तरह का विचार करना मोदी और उनकी सरकार के लिए जांच में मददगार साबित हो सकता है. सरकारी पक्ष आज तक सभी दोषियों को सजा नहीं दिला पाया है."

यह चिट्ठी 29 नवंबर को मंत्री क्लिंटन को लिखी गई है और इसे सोमवार को प्रेस में जारी किया गया. 2002 के गुजरात दंगों के कुछ पीड़ित परिवार वालों से मुलाकात के समय रिपब्लिकन सांसदों जो पिट्स और फ्रैंक वोल्फ ने इसे मीडिया के सामने पेश किया.

उन्होंने कहा, "भारत एक शानदार लोकतंत्र है और उच्च स्तर के नेतृत्व और विकास का प्रेरणास्त्रोत है. यह भयावह है कि कुछ पार्टियां भारत में मोदी को ऊंचा उठाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि उनका संबंध इन दंगों से रहा है. उन्हें अमेरिका आने देने की इजाजत देना 2002 के दंगों की जांच में सही नहीं होगा और न ही मानवाधिकार के मानकों के हिसाब से ठीक होगा."

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जिन लोगों ने इस चिट्ठी पर दस्तखत किए हैं, उनमें जॉन कॉनयर्स, ट्रेंट फ्रैंक्स, जेम्स मोरन, माइकल होंडा, बिल पास्क्रेल, बारबरा ली, एडवर्ड मार्की, जिम जॉर्डन, डैन बर्टन, माइकल कापुआनो और डो लैमबॉर्न शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि बुश प्रशासन ने मोदी का वीजा इनकार करके बिलकुल ठीक किया था, जो अब प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मुद्दे पर वह विदेशी प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर रहे हैं और हमें लगता है कि इस सिलसिले में वह फिर अमेरिका आने की कोशिश करेंगे.

"हम सम्मान के साथ अमेरिकी सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह मोदी को अमेरिका आने की अनुमति न दे क्योंकि वह कई रिपोर्टों में आरोपी हैं और मानवाधिकार के खिलाफ मुद्दों में उनका नाम है."

इस पत्र में आरोप लगाया गया है, "गैरसरकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली गुजरात सरकार ने दंगे करने वालों को नेतृत्व और समर्थन दिया. ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि गुजरात में मुस्लिमों के खिलाफ हमलों में बीजेपी सरकार की सक्रिय भूमिका है. इस मामले में पुलिस की भी भूमिका बताई जाती है."

पत्र में कहा गया है कि पहले भी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक सहिष्णुता के आधार पर मोदी को वीजा नहीं दिया गया है क्योंकि वह दंगों में शामिल रहे हैं. सांसदों ने कहा कि गुजरात सरकार ने 2002 के दंगों के खिलाफ सही और पर्याप्त कदम नहीं उठाए.

उनका कहना है, "चूंकि इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है और दंगा पीड़ितों के साथ न्याय होना अभी बाकी है, इसलिए हम मांग करते हैं कि मोदी को वीजा न देने का रुख बरकरार रखा जाए. चूंकि मोदी भारत में एक ऊंचे पद के लिए कोशिश कर रहे हैं, हमारा मानना है कि उनके वीजा को लेकर नीति बदलने से मोदी और उनकी सरकार जांच में बाधा बनेगी."

एजेए/ओजेएस (पीटीआई)

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