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दुनिया

मोदी का भाषण ही उनका शासन है: कांग्रेस

कांग्रेस अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, शिक्षा क्षेत्र से लेकर सामाजिक मोर्च तक मोदी सरकार के काम और दावों पर सवाल उठाती है. सरकार के कामकाज पर मुख्य विपक्षी पार्टी का नजरिया बता रहे हैं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला.

अच्छे दिनों के वादे के साथ 2014 में सत्ता में आई मोदी सरकार तीन साल पूरे कर चुकी है. सरकार जहां हर क्षेत्र में अपनी अपनी बड़ी उपलब्धियों का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि सिवाय प्रचार के कुछ नही हो रहा है. पेश हैं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के साथ हुई बातचीत के मुख्य अंश.

केंद्र की मोदी सरकार के तीन साल के प्रदर्शन को आप कैसे देखते हैं?

भाजपा सरकार के तीन साल को आप एक ही लाइन में समेट सकते हैं. यह है मोदी जी के लिए- मेरा भाषण ही मेरा शासन है. भाषण और प्रचार और लीपापोती सरकार. दो करोड़ रोजगार हर साल पैदा करने का वादा कर सत्ता में आई सरकार अब सिर्फ एक लाख 35 हजार रोजगार पैदा कर पा रही है. इस हिसाब से दस करोड़ रोजगार मोदी जी पांच साल की बजाय छह सौ साल में दे पाएंगे. किसान देश की आबादी का 62 प्रतिशत है. लेकिन 35 किसान हर रोज आत्महत्या करते हैं. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 12,0062 किसान 2015 में और 14 हजार किसान 2016 में आत्महत्या कर चुके हैं. मोदी जी ने वादा किया था कि किसान की लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा देंगे. लेकिन बाद में उससे साफ इनकार कर गए और सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने शपथ पत्र देकर कहा कि ऐसा नहीं हो सकता. हर नौ मिनट में इस देश में एक महिला के साथ बलात्कार होता है. इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन गिर गया है. उद्योग धंधे चौपट हैं. क्रेडिट ऑफ टेक 63 साल में सबसे कम हो गया है. चारों तरफ आप देखें तो बड़बोली बातों और भाषणों के अलावा कुछ नहीं है.

लेकिन सरकार ने बहुत सारी पहलें की है जैसे डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और भी बहुत कुछ. आप उन्हें कैसे देखते हैं?

कांग्रेस की सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना या कहिए स्किल योजना शुरू की थी. अब प्रधानमंत्री मोदी ने उसे स्किल इंडिया का नाम दे दिया है. देखिए स्किल इंडिया के आंकड़े क्या कहते हैं. 100 में से सिर्फ 11 लोग ही स्किल इंडिया से सर्टिफिकेट लेकर नौकरी के योग्य पाए गए. इसका मतलब है कि 90 युवाओं को फर्जी स्किल दी गई या स्किल दी ही नहीं गई. सिर्फ सर्टिफिकेट दिया गया. हम किसे अंधकार में धकेल रहे हैं. एक नमामि गंगे स्कीम शुरू की गई थी. कहा गया कि गंगा की सफाई के लिए 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. आजतक केवल उसके चार प्रोजेक्ट पूरे कर पाए हैं तीन साल में. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस स्पीड से तो गंगा की सफाई में 100 साल लगेंगे. तीसरी बात आपने जनधन योजना की बात की. जनधन योजना में 18 करोड़ खाते हम खोलकर गए. लेकिन सच्चाई है कि 28 करोड़ खाते और खुलने के बावजूद 72 प्रतिशत खातों में एक रुपया भी जमा नहीं है. तो मैं बैंक खाते का करूंगा क्या जब उसमें पैसे ही नहीं हैं. लोगों ने भी खाते इसलिए खुलवाए कि मोदी जी ने कहा था कि हर हिंदुस्तानी के खाते में 15-15 लाख डालूंगा. लेकिन वह वादा अमित शाह के मुताबिक अब जुमला बन गया. लगभग यही हाल उनकी हर एक स्कीम का है.

स्किल या कौशल विकास के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है. क्या किसी सरकार से तीन साल के भीतर सब कुछ बदल देने की उम्मीद सही है?

देखिए भारत में आप पांच साल के लिए चुने जाते हैं. 300 साल के लिए नहीं. या तो आप कहें कि मुझे 300 साल लगेंगे अपना एजेंडा लागू करने में तो फिर लोग फैसला करेंगे. आपने मूलभूत शिक्षा की बात कही. क्या यह नहीं है कि शिक्षा के बजट को मोदी जी तीन साल से कम कर रहे हैं. तो फिर शिक्षा को कैसे बढ़ावा मिलेगा. मोदी जी कहते थे कि मैं तो नौजवानों को रोजगार के अवसर जर्मनी, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में दिलाऊंगा और शिक्षक एक्सपोर्ट करूंगा. लेकिन अब सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक 12 हजार पोस्ट केंद्रीय विश्वविद्यालयों और आईआईटी संस्थानों में खाली हैं. इसका नतीजा यह है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और दिल्ली यूनिवर्सिटी में बच्चों ने दाखिला लेना बंद कर दिया और यहां तक कि पढ़ने वालों की सात हजार पोस्ट इस साल खाली चली गयीं. तो कैसे देश चलेगा.

केवल आरएसएस के लोगों को वाइस चांसलर बना कर शिक्षा कैसे बेहतर हो जाएगी. जब देश के प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि प्लास्टिक सर्जरी भारत से ही शुरू हुई क्योंकि भगवान गणेश को हाथी सूंड लगाई गई थी. जब वह ही इस तरह की भ्रांतियां फैलाएंगे तो फिर देश में वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का प्रचार प्रसार होगा कैसे? सवाल यह है.

लेकिन कांग्रेस के विरोधी कहते हैं कि देश में 70 में से 60 साल तो कांग्रेस का ही शासन रहा है. इस आलोचना को आप कैसे देखते हैं?

हम इसे सहर्ष स्वीकारते हैं. लेकिन हमारे विरोधी 60 साल ऐसे कहते हैं जैसे हमने जबरन कब्जा कर लिया. 60 साल अगर कांग्रेस की सरकार रही है तो 12 बार इस देश के लोगों ने कांग्रेस को चुना. अब हमें नकार कर मोदी जी को चुना है क्योंकि उन्हें लगा कि मोदी जी के वादे कांग्रेस से बेहतर हैं. तो अब वह यह कह रहे हैं कि चूंकि 60 साल कांग्रेस की सरकार रही इसलिए मैं अपने वादे पूरे नहीं करूंगा. तो वे बता दें कि वादे पूरे करने में मैं 60 साल लूंगा, 250 साल लूंगा या 500 साल लूंगा. उन्हें यह बताना चाहिए. उन्हें यह नहीं कहना चाहिए कि पांच साल में वादे पूरे नहीं हो सकते. उन्होंने कहा था कि मुझे 60 महीने चाहिए. आप याद करिए नारा था 60 साल बनाम 60 महीने. लेकिन 36 महीने में इस देश की छवि धराशायी उन्होंने कर दी. वह तो विदेशों में जाकर यह तक कहते हैं कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले भारतीय होना शर्म की बात थी. जो प्रधानमंत्री अपने देश के नागरिकों का मजाक उड़ाए, जिस देश का प्रधानमंत्री नाटकीय भाषण से आगे न चल पाए, तो वह देश चलेगा कैसे? इसलिए जनता के प्रहरी और चौकीदारी के रूप में हम अपनी आवाज उठा रहे हैं.

आपने जो भी नाकामियां गिनाईं, उनके बावजूद मोदी को लोगों को अपार समर्थन मिल रहा है. तो क्या कांग्रेस अपनी बात लोगों तक पहुंचा नहीं पा रही है?

देखिए हाल में जो पांच राज्यों के चुनाव हुए थे उनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा जीती. पंजाब में कांग्रेस की सरकार है. हम यह ना भूलें कि मणिपुर और गोवा में भी कांग्रेस ही जीती. गोवा में बीजेपी के मुख्यमंत्री तक हार गए. अगर आप 11 विधायकों की संख्या तोड़ फोड़ कराकर 22 कर लें और राज्यपाल के आधार पर जबरदस्ती सरकार बनाएं तो उसे बहुमत बताना अनुचित होगा. यह सच है कि मोदी जी कई प्रांतों में जीते हैं. हमें अपनी बात (लोगों के सामने) पुरजोर तरीके से रखनी पड़ेगी. लेकिन उत्तर प्रदेश में जीतने का यह मतलब नहीं है कि इस देश में बोलने का अधिकार खत्म हो गया. सच यह है कि भाजपा के शासन में बोलने का अधिकार, सोचने का अधिकार, खाना खाने का अधिकार, कपड़े पहनने का अधिकार, घूमने जाने का अधिकार और अपनी मर्जी से व्यवहार करने का अधिकार, सब भाजपा सरकार ने छीन लिया है.

सामाजिक मोर्च पर आप इस सरकार के काम को कैसे देखते हैं क्योंकि सामाजिक शांति और सुरक्षा का विकास से बहुत लेना देना है?

जिस तरह का नफरत और घृणा का माहौल भारतीय जनता पार्टी ने चलाया है, वह आपके सामने है. समाज को जाति और धर्म के नाम पर आए दिन बांटा जा रहा है. जिस तरह नागरिक से उनकी जाति, धर्म और क्षेत्र पूछा जाता है, ये भारत की मूलभूत भावना और सिद्धांत के बिल्कुल अलग है. गरीबों और दलितों के ऊपर अत्याचार हो रहे हैं. सहारनपुर में जिस तरह दलितों के घर उजाड़े जा रहे हैं, हत्याएं हो रही हैं, वह अपने आप में उत्तर प्रदेश की सरकार के लिए शर्मनाक बात है. इससे पहले गुजरात के ऊना में दलितों के कपड़े उतार कर उन्हें पीटा गया, उनकी चमड़ी उतार दी गई, ऐसा आजाद हिंदुस्तान में शायद कभी नहीं हुआ. डेल्टा मेघवाल की हत्या जिस तरह राजस्थान में हुई, वह बहुत ही अशोभनीय है. रोहित वेमुला को जिस तरह भाजपा नेताओं और एबीवीपी के गुंडों ने प्रताड़ित कर आत्महत्या की तरफ धकेल दिया, उससे अशोभनीय और क्या हो सकता है. सामाजिक तानाबाना टूट रहा है. नफरत और घृणा सत्ता के अहंकार में भाजपा के सिर चढ़ कर बोल रही है.

इंटरव्यू : अशोक कुमार

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