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विज्ञान

मोटापे से निपटने के लिए गाजर की ब्रांडिंग

आलू की चिप्स को बेहतरीन स्नैक के तौर पर पेश करने के लिए अमेरिका से शुरू हुई धुंआधार ब्रांडिंग से कंपनियों ने मुनाफा और लोगों ने मोटापा पाया. अब गलती का अहसास हुआ और अमेरिका में गाजर को स्नैक की तरह पेश किया जा रहा है.

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अमेरिका से शुरू हुए फास्ट फूड के चलन के दुनिया भर में जोर पकड़ते ही लोगों में मोटापा भी खूब बढा़. अमेरिका में तो हालत यह हो गई कि सरकार को आधिकारिक तौर पर मोटापे को राष्ट्रीय समस्या घोषित करना पड़ा. इससे लोगों में भी बढ़ती परेशानी को भांप कर सब्जी इंडस्ट्री ने आलू के विकल्प के रूप में गाजर को मार्केट में उतार दिया है.

अक्सर अमेरिका से शुरू होने वाला ब्रांडिंग का काम गाजर के मामले में भी यहीं से शुरू हुआ. नाश्ते में स्नैक के तौर पर गाजर का इस्तेमाल सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन इसे सेहत से जोड़ कर अमेरिका के सब्जी उद्योग ने इसकी धुंआधार ब्रांडिंग शुरू कर दी है.

Dicke Kinder bei McDonald's Schnellrestaurant Übergewicht

फास्ट फूड से फास्ट मोटापा

इतना ही नहीं गाजर को बेहद सेक्सी स्नैक भी बता कर बाजार में पेश किया जा रहा है.

अमेरिकी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब वहां गाजर इंडस्ट्री ने विज्ञापन और मार्केटिंग की 50 कंपनियों के साथ मिलकर सिर्फ गाजर के लिए ब्रांडिंग का काम शुरू किया है. छिली हुई छोटी छोटी गाजरों को बेहद आकर्षक पैकिंग में पेश किया जा रहा है. इस तरह की पैकिंग इससे पहले आलू की चिप्स के लिए ही की गई थी.

इसे व्यापक पैमाने पर लोकप्रिय बनाने के लिए स्कूलों में वेंडिंग मशीन भी लगाई गईं हैं. इसके अलावा टीवी विज्ञापनों में गाजर को बेहद सैक्सी स्नैक के तौर पर पेश किया जा रहा है. इसे खाने पर मुंह से निकलने वाली चटखारेदार आवाजों को भी तरह तरह से बुद्धू बक्से पर दिखाया जा रहा है. और तो और आई फोन के लिए भी एक एप्लीकेशन तैयार किया गया है जिसके जरिए दुनिया भर में गाजर को हर दिल अजीज बनाने की पुरजोर कोशिश चल रही है.

हालांकि विज्ञापन जगत के जानकारों ने ब्रांडिंग के इस धमाकेदार अभियान में सेहत के बजाय सिर्फ गाजर पर ही जोर देने को एक भूल करार दिया है. आशंका जताई जा रही है कि इससे लोगों में, खासकर बच्चों में मायूसी पैदा हो सकती है कि इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ गाजर को बढ़ावा देना है.

रिपोर्टः एजेंसी/निर्मल

संपादनः आभा एम