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विज्ञान

मोटापे के खिलाफ खेल खिलाते मेडिकल छात्र

बदलते खानपान और जीवनशैली के बीच बच्चे सभी जगह चुस्त रहने के बजाए मोटे होते जा रहे हैं. जर्मनी में बोखुम के मेडिकल छात्र इन बच्चों को सेहतमंद रहने के गुर कुछ यूं सिखा रहे हैं, जिसमें मजा है.

बच्चों के साथ भागते भागते लिलियन की सांस फूल रही है. मेडिकल की पढ़ाई पढ़ रही एलिजा शुंकेर्ट बोखुम के म्यूनिसिपल स्कूल में बच्चों से सवाल करती हैं कि खेल कूद क्यों जरूरी है. लिलियन हाथ उठाकर जवाब देती है, "इससे मांसपेशियां और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है."

टीमों को जीतने के लिए खेल के साथ सेहत से जुड़े सवालों के सही जवाब भी देने होते हैं. 'ऐड ऐडिक्शन' कार्यक्रम की प्रमुख शुंकेर्ट कहती हैं, "हम स्कूल में बच्चों को सेहतमंद रखने के लिए उन्हें खेल खेल में ये बांतें सिखाना बेहद जरूरी मानते हैं." स्कूल की पांचवीं क्लास के बच्चों को ये बातें सिखाने के लिए शुंकेर्ट हफ्ते में एक दिन अपने पांच और साथियों के साथ यहां आती हैं.

कब्जा कर चुके कंप्यूटर

विटेन के पांच मेडिकल छात्रों ने 'ऐड ऐडिक्शन' प्रोजेक्ट की शुरुआत पांच साल पहले की थी. उन्होंने रॉबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट में जर्मन बच्चों में बढ़ रहे मोटापे के बारे में जाना. उन्हें पता चला कि दस में से हर छठा बच्चा मोटापे का शिकार है.

बोखुम के सेकेंड्ररी स्कूल के हेडमास्टर रॉबर्ट कॉख कहते हैं, "अमेरिका की तरह हमारे यहां देश भर के सकूलों में बच्चों के लिए खेल कूद के कार्यक्रम नहीं होते हैं. मुझे खुशी है कि मेडिकल के छात्र हमारे यहां आकर पांचवीं क्लास के बच्चों को यह सिखा रहे हैं." वह मानते हैं कि इन दिनों बाहरी खेल कूद की जगह पर कंप्यूटर और वीडियो गेमों ने कब्जा कर लिया है. बच्चों में भी खेल कूद और तैराकी जैसी चीजों में दिलचस्पी नहीं दिखती.

सुखी जीवन का मंत्र

'ऐड ऐक्शन' कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को सिखाया जाता है कि खेल और कसरत एक साथ करना मजेदार हो सकता है. और सुखी जीवन के लिए सेहतमंद खाना, आत्मविश्वास और टीम के साथ मिलजुल कर चलना बहुत जरूरी है. बैडमिंटन, वॉलीबॉल और रग्बी के अलावा बच्चों को थोड़ा बहुत खाना बनाना भी सिखाया जाता है. शुंकेर्ट ने बताया कि जब वह पिज्जा जैसी चीजें बच्चों के साथ बनाती हैं तो साथ में उनको बताती रहती हैं कि किस चीज का शरीर पर कैसा असर पड़ता है.

बच्चों को कभी कभी बाड़ियों में भी ले जाया जाता है जहां वे दौड़ती भागती मुर्गियों और दूसरे जानवरों को देख कर बहुत खुश होते हैं.

दुख भी है मोटापे का कारण

खानपान की खराब आदतों से मोटापा बढ़ता है. लेकिन सुंकेर्ट कहती हैं कि खाने पीने की खराब आदतें सिर्फ जानकारी की कमी की वजह से नहीं होती. दुख और अकेलेपन में भी ऐसा होता है. उन्होंने कहा, "कई बार मैं इन बच्चों को गले लगाती हूं या बाहों में भर लेती हूं. मुझे लगता है कि उनको पता होना चाहिए कि हम स्कूल उन्हीं के लिए आते हैं और हम उनके साथ बहुत खुश हैं."

अध्ययन के अनुसार अक्सर समाज के निचले तबके के बच्चे ज्यादा मोटापे के शिकार पाए जाते हैं. 11 से 13 साल की उम्र के बच्चों में मोटापे के मामले ज्यादा हैं. शुंकेर्ट मानती हैं कि जर्मनी के शहरों में 'ऐड ऐक्शन' जैसे और कार्यक्रमों की जरूरत है. वह चाहती हैं कि दूसरी यूनिवर्सिटियों के छात्र भी उनके इस कार्यक्रम से प्रेरणा लें क्योंकि जर्मनी में हर शहर में कम से कम एक ऐसे कार्यक्रम की जरूरत है.

रिपोर्ट: जबीने डामाश्के/ एसएफ

संपादन: ईशा भाटिया

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