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दुनिया

मैर्केल ने छेड़ा शरणार्थियों पर समर्थन का अभियान

घरेलू विरोध झेल रही जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने शरणार्थी समस्या पर चौतरफा अभियान शुरू किया है. एक ओर यूरोपीय नेताओं से शरणार्थियों को अपने अपने देशों में लेने की वकालत तो दूसरी ओर जर्मनी में जनमत को मनाने की कोशिश.

जर्मनी में चांसलर नियमित रूप से मीडिया से बात करती हैं लेकिन फिर भी ऐसा कम ही होता है कि वे किसी टॉक शो में जाएं. बुधवार अपवाद था. चांसलर मैर्केल जर्मनी के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एआरडी में प्रमुख एंकर आन्ने विल के टॉक शो में गईं और अपनी शरणार्थी नीति का बचाव किया. उन्होंने इस पर जोर दिया कि वे गृहयुद्ध की त्रासदी से भागने वाले शरणार्थियों को पनाह देने की नीति जारी रखेंगी.

सीरिया में गूगल सर्च के मुख्य विषयों में अस्पताल का पता, घायलों का कैसे इलाज करें और देश से कैसे भागें जैसे विषय हैं. लेकिन मानवीय संवेदना के साथ साथ चांसलर मैर्केल ने यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा की सुरक्षा पर भी बल दिया. चांसलर मैर्केल एक ओर मानवीय चेहरा दिखा रही हैं तो दूसरी ओर प्रशासनिक तौर पर भी शरणार्थी समस्या से निबट रही हैं.

खुद अपने देश में शरणार्थियों को देश भर में बांटने और उन्हें जाड़ों से पहले सुरक्षित ठिकानों पर रखने की व्यवस्था के समन्वय का काम गृह मंत्रालय से लेकर चांसलर कार्यालय को सौंप दिया गया है. चांसलर कार्यालय के मंत्री पेटर अल्टमायर का कहना है कि वे चाहते हैं कि जर्मनी में शरणार्थियों का आना व्यवस्थित तरीके से हो. सरकार तिहरी रणनीति पर काम कर रही है. एक तो जर्मनी आए शरणार्थियों को ठहराने और शरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय निकायों को पर्याप्त धन देना, यूरोपीय स्तर पर शरणार्थियों के बंटवारे की कोशिश ताकि किसी एक देश पर बोझ न पड़े और तुर्की से बातचीत ताकि वहां से शरणार्थियों के आने को रोका जा सके.

जर्मनी में सार्वजनिक प्रसारक टीवी चैनल एआरडी के एक कार्यक्रम में दिखाई गई मैर्केल की बुर्के वाली तस्वीर पर काफी हंगामा हुआ है. यूरोप में भी चांसलर मैर्केल की शरणार्थी नीति का विरोध हो रहा है. यहां तक की यूरोपीय परिषद के प्रमुख डोनाल्ड टुस्क भी भारी संख्या में शरणार्थियों के आने का विरोध कर रहे हैं. लेकिन चांसलर के लिए यह सवाल हंगरी में मुश्किल झेल रहे शरणार्थियों को जर्मनी में आने देने के लिए सिर्फ एक बार लिया गया फैसला नहीं है. वे सचमुच समस्या का समाधान चाहती हैं, और वह भी यूरोपीय स्तर पर.

उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद के साथ यूरोपीय संसद को संबोधित किया. मैर्केल ने कहा यदि यूरोप चाहे तो वह शरणार्थी समस्या से निबट सकता है लेकिन इसके लिए नई नीति तय करनी होगी. चांसलर ने कहा कि शरणार्थियों पर डब्लिन प्रक्रिया अब काम की नहीं रही. उसके तहत शरणार्थियों को यूरोपीय संघ के उसी देश में शरण के लिए आवेदन देना होता है, जहां से वह पहली बार ईयू में प्रवेश करता है.

यूरोपीय संसद से लौटकर चांसलर ने आन्ने विल के टॉक शो में अपनी शरणार्थी नीति की व्याख्या की. पिछले दिनों में उन्हें अपनी ही पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े और सहयोगी पार्टी सीएसयू की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है.

मुस्लिम शरणार्थियों को पनाह देने के फैसले के कारण चांसलर की लोकप्रियता में भी कमी आई है. अगला चुनाव हारने के डर से उनकी पार्टी के कई नेता शरणार्थियों की सीमा तय करने या शरण के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं.

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