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फीडबैक

"मैं सदा डॉयचे वेले के साथ हूं"

हाल ही में पाठकों से मिली खट्टी मीठी फीडबैक आप सबसे शेयर करते हैं...

चाचा चौधरी,साबू,बिल्लू जैसे ढेरों कार्टूनों में जान फूंकने वाले प्राण के देहांत की खबर से दिल बैठ सा गया. जब से लिखने पढ़ने का ककहरा सीखा है तभी से प्राण रचित इन किरदारों के साथ जिंदगी जीने की आदत सी पड़ गई थी. दुनिया कहां से कहां पहुंच गई,कार्टून भी पत्र-पत्रिकाओं से निकलकर डिजिटल हो गए लेकिन डायमण्ड कॉमिक्स के इन पात्रों सी जीवंतता और रोचकता का रस आज भी कहीं नहीं मिल पाता. बचपन में तो कभी-कभी ऐसा लगता था ये किरदार कहीं न कहीं दुनिया में वास कर रहे हैं. कभी कभी तो पापा से जिद कर बैठता था मुझे चाचा चौधरी से मिलना है. हमेशा चाचा चौधरी के तेज दिमाग, साबू की बलशाली खुराफात और बिल्लू की शरारतें मन को छू लेने वाली लगती थीं. डॉयचे वेले पर प्राण से लिए गए साक्षात्कार को पहले तो मैं नहीं सुन सका था लेकिन आपने इस दुःखद खबर के साथ आडियो क्लिप डालकर आंखों को नम कर दिया. सचमुच मुझे तो ऐसा लगता है हम कितने खुशनसीब थे तो इस तरह के कालजयी कार्टूनों के रचियता पात्रों के साथ बड़े हुए. इस तरह के समर्पित कार्टूनिस्ट शायद ही कभी पैदा हो. - रवि श्रीवास्तव, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश

क्यों धोखा देते हैं पुरुष - वास्तव में ये सब शोध फालतू हैं. मैं बहुत सी महिलाओं को जानता हूं जो सरासर अपने पतियों या भावी पतियों को धोखा दे रही है. यहां जेंडर नहीं आदत महत्वपूर्ण है, ऐसा पुरुष और स्त्रियां दोनों करते हैं. - प्रमोद दीक्षित, गाजियाबाद

मैं डॉयचे वेले की वेबसाइट पर हर विषय से संबंधित पेज रोज देखता हूं. इसमें हमें बहुत सारी जानकारी प्राप्त होती है जो की मीडिया के अन्य माध्यम से नहीं मिलती. हिन्दी साहित्य के कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का नाम हम सब जानते हैं, उनके द्वारा लिखित कई उपन्यास और कहानियां बहुत लोकप्रिय हैं लेकिन उनके गांव लमही को हेरिटेज विलेज के रूप में विकसित किया जाने के खबर पहली बार डॉयचे वेले की वेबसाइट से ही प्राप्त हुई.

'होलोकॉस्ट' यहूदी पीड़ितों में से सबसे अधिक चर्चित एक डायरी लिखने वाली और लेखिका के बारे में 'ऐन फ्रैंक' की कहानी शीर्षक तस्वीरों की पेशकाश अच्छी लगी लेकिन इस अधिक चर्चित द्वितीय विश्व युद्ध के समय के ऐतिहासिक व्यक्तित्व के बारे में केवल सात तस्वीरें पर्याप्त नहीं हैं. अच्छी प्रस्तुति के लिए डॉयचे वेले को धन्यवाद. मैं हमेशा डॉयचे वेले के साथ हूं, रहूंगा भी, ये मेरा वादा है, जो मैं सदा निभाता रहूंगा. - सुभाष चक्रबर्ती, नई दिल्ली

संकलनः विनोद चड्ढा

संपादनः आभा मोंढे