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मनोरंजन

मेरी नाकामियों की दास्तां

जाने-माने अभिनेता अनुपम खेर का कहना है कि आत्मकथात्मक नाटक 'कुछ भी हो सकता है' उनकी कामयाबी नहीं, बल्कि नाकामायाबियों की दास्तां है.

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खेरः नाकामियों का सिलसिला

खेर शायद पहले अभिनेता हैं जो अपनी आत्मकथा और संघर्षों पर आधारित नाटक का एकल मंचन कर रहे हैं. इसी सिलसिले में वह कोलकाता में थे. वह कहते हैं, ‘यह नाटक उन गलतियों के बारे में बताता है जो मैंने अपने जीवन में की थी. उनको इस बात का मलाल है कि मौजूदा दौर के युवा कम समय में ही मशहूर होना चाहते हैं. इसलिए वे नाटकों की बजाय फिल्मों को तरजीह दे रहे हैं.

Bollywood Schauspieler Anupam Kher

इसका ख्याल आपके मन में आया कैसे ? इस सवाल पर खेर बताते हैं, ‘मैंने मंच के जरिए अपने जीवन और अतीत में झांकने का प्रयास किया है. मैं चाहता था कि इस नाटक के जरिए लोगों को अपनी नाकामियों के बारे में बताऊं, ताकि वे जीवन में इन गलतियों को नहीं दोहराएं.'

लेकिन अमूमन ऐसा नहीं होता. अभिनेता अपनी आत्मकथा के मंचन की बजाय उसे किताब की शक्ल देना पसंद करते हैं ? खेर बताते हैं कि उनको भी आत्मकथा लिखने का प्रस्ताव मिला था. लेकिन मैंने इसके बजाय अपने जीवन में घटी घटनाओं के मंचन का फैसला किया. मैं इन घटनाओं और खासकर नाकामियों को जीवंत तरीके से दूसरों के साथ साझा करना चाहता था.

मौजूदा दौर में नाटकों के प्रति युवकों का लगाव कम होने का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि युवा वर्ग तुरंत मशहूर होना चाहता है. इसलिए वह नाटकों की बजाय फिल्मों को चुन रहा है. लेकिन बढ़िया नाटकों की कमी उससे भी बड़ी चिंता का विषय है. सिनेमा और थिएटर के बीच के फर्क की व्याख्या करते हुए खेर कहते हैं, कि ‘सिनेमा निर्देशक का माध्यम है. लेकिन थिएटर में मध्यस्थ की कोई भूमिका नहीं है. सैकड़ों रीटेक की सहायता से औसत कलाकार भी सिनेमा में कामयाब हो सकता है. लेकिन मंच पर अभिनय के लिए मनोबल जरूरी है.'

महेश भट्ट ने 26/11 के मुंबई हमलों पर कुछ लोग शीर्षक जो फिल्म शुरू की है, उसमें अनुपम खेर भी हैं. खेर कहते हैं कि वे इस फिल्म का हिस्सा बन कर बेहद गर्वित हैं. यह फिल्म उन लोगों की कहानी बताती है जिनका जीवन उन आतंकी हमलों के बाद बदल गया. इसकी कहानी मुस्लिम समुदाय के एक युवक के आस-पास घूमती है.

आपका अब तक फिल्मी सफर कैसा रहा है ? इस सवाल पर खेर कहते हैं कि यह एक इंसान के तौर पर खुद की दोबारा तलाश का सफर रहा है. इसके जरिए ही आदमी अपने भीतर छिपे अभिनेता की दोबारा तलाश कर पाता है. अपनी भावी योजनाओं का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, कि ‘फिलहाल न्यूयार्क में प्रस्तावित अपने अभिनय स्कूल में व्यस्त हूं. मैंने अभी यमला पगला दीवाना फिल्म की है. वह भूमिका मजेदार थी. लेकिन जीवन में सिनेमा के अलावा भी बहुत कुछ है.'

रिपोर्टः प्रभाकर मणि, कोलकाता

संपादनः एमजी

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