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ताना बाना

मेडिसिन में कोर्स शुरू करेगी आईआईटी

दुनिया भर में धाक जमा चुकी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी अब चिकित्सा के क्षेत्र में भी पाठ्यक्रम शुरू करेगी. फैकल्टी में विदेशी प्रोफेसरों और पोस्टग्रैजुएट कोर्स में विदेशी छात्रों को शामिल करने को भी हरी झंडी.

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भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में आईआईटी परिषद की एक बैठक हुई जिसमें इन सभी बदलावों को मंजूरी दे दी गई. सिब्बल ने कहा है कि वह मेडिसिन का कोर्स उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी चाहते हैं. आईआईटी परिषद ने चिकित्सा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने के लिए इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी एक्ट में संशोधन करने का फैसला किया है.

कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी मेडिकल काउंसिल से कुछ बातों में मंजूरी मिलनी बाकी है. उन्होंने कहा, "मेडिसिन के किसी भी क्षेत्र में अगर आईआईटी से डिग्री मिलती हो तो फिर हमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी लेनी जरूरी है. लेकिन अगर पढ़ाई सिर्फ रिसर्च आधारित हो और डिग्री न मिल रही हो तो फिर इसकी कोई जरूरत नहीं है." तकनीकी पेंचों पर सहमति बनाने के लिए एक स्थायी समिति बनाने का फैसला लिया गया है जिसकी अध्यक्षता आरए माशेलकर करेंगे. माशेलकर काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के अध्यक्ष रह चुके हैं.

बैठक में विदेशी प्रोफेसरों को आईआईटी फैकल्टी में शामिल करने पर भी सहमित हुई है लेकिन कुल फैकल्टी के 10 फीसदी प्रोफेसर ही बाहर से बुलाए जा सकते हैं. सिब्बल ने बताया, "सैद्धांतिक रूप से हम सहमत है कि आईआईटी में विदेश से प्रोफेसर आने चाहिए. इस संबंध में गृह मंत्रालय से एक ढांचे पर बात की जाएगी ताकि प्रक्रिया में मुश्किलें पेश न आएं और लोगों के आने जाने पर कड़ी शर्तें न हों."

आईआईटी का कहना है कि कैम्पस में विदेशी प्रोफेसरों के होने से छात्रों को दुनिया के बेहतरीन प्रोफेसरों से दो चार होने का अवसर मिलेगा जिससे संस्थान की अंतरराष्ट्रीय छवि में इजाफा होगा. आईआईटी उम्मीद जता रही है कि इस कदम के बाद प्रतिभा पलायन को भी रोका जा सकेगा. बैठक में पोस्टग्रैजुएट पाठ्यक्रम में 25 फीसदी विदेशी छात्रों को दाखिला देने पर भी रजामंदी हुई है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: वी कुमार

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