1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मृत्युदंड से नाकामी छुपाता इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो मौत की सजा देकर ड्रग्स की खिलाफ लड़ना चाहते हैं. लेकिन ये लड़ाई मृत्युदंड पर नहीं बल्कि पुलिस और प्रशासन की ईमानदारी पर टिकी है.

इंडोनेशिया में 10 विदेशी नागरिक मौत की सजा का सामना कर रहे हैं. इनमें दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं. 2008 में गिरफ्तार ये दोनों अपराधी जेल में हैं. बाकी दोषी ब्राजील, फ्रांस, घाना, नाइजीरिया और फिलीपींस के हैं. पांच दोषियों को जनवरी में गोली मारकर मौत की सजा दी जा चुकी है. बाकी मौत के तख्त पर खड़े हैं.

बीते साल चुनाव जीतकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बने जोको विडोडो कह रहे हैं कि देश ड्रग्स इमरजेंसी से जूझ रहा है, "आप एकतरफा पक्ष मत देखिये. आप नशा मुक्ति केंद्रों में जाइये. इस वक्त वहां 45 लाख लोग हैं. 18 लाख ऐसे हैं जिनका इलाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में हमें देखना चाहिए कि हम इंडोनेशिया के लिए किस तरह की पीढ़ी तैयार कर रहे हैं." जोकोवी के नाम से मशहूर राष्ट्रपति, तस्करों को मौत की सजा देकर कड़ा संदेश देना चाहते हैं. वो देशवासियों को दिखाना चाहते हैं कि वह कमजोर नेता नहीं हैं.

Joko Widodo

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो

लेकिन विदेशी नागरिकों को गोली मारकर मौत की सजा देना इतना आसान नहीं. ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, फ्रांस और दूसरे देश इंडोनेशिया से अपील कर रहे हैं कि वो उनके नागरिकों को मौत की सजा न दे. ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के इंडोनेशिया के गहरे कारोबारी रिश्ते हैं. मौत की सजा का असर इन रिश्तों पर जरूर पड़ेगा. लेकिन जोकोवी इस राह में इतने आगे बढ़ चुके हैं कि उनके लिए पीछे हटना अब बहुत ही मुश्किल हो चुका है.

जोकोवी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कुछ दोषियों को गोली मार देने से इंडोनेशिया में नशे की तस्करी बंद हो जाएगी. इंडोनेशिया की पुलिस भ्रष्टाचार के लिए बदनाम है. ऐसा कई बार हो चुका है जब पुलिस द्वारा जब्त मादक पदार्थ फिर से काले बाजार में आ जाते हैं. पुलिस पर तस्करों से साठ गांठ के आरोप लगते हैं. ऐसे में कुछ दोषियों को मौत की सजा देने से समस्या नहीं सुलझेगी.

भ्रष्टाचार मिटाने का नारा देकर सत्ता में आए जोकोवी को अपने घर यानी सरकारी तंत्र की सफाई करनी होगी. ऐसा हुआ तो कई समस्याएं खुद सुलझने लगेंगी, वरना इंडोनेशिया इसी बहस में फंसा रहेगा कि तस्करों के साथ क्या किया जाए.

ब्लॉग: ओंकार सिंह जनौटी

DW.COM