1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मृत्युदंड पर सौदा नहीं करेगा इंडोनेशिया

इंडोनेशिया की एक अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाए गए ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की अपील पर सुनवाई की तारीख तय की. ड्रग ट्रैफिकिंग के इन दोनों आरोपियों के मामले से देश में मृत्युदंड की सजा को खत्म करने की मांग ने जोर पकड़ा है.

अपने दो नागरिकों की जान बचाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इंडोनेशिया को उन्हें जीवन भर जेल में रखने का खर्च अदा करने का प्रस्ताव दिया है. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इन दोनों आरोपियों मयूरन सुकुमारन और एन्ड्रयू चैन की सजा माफ ना करने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ इन ऑस्ट्रलियाई नागरिकों ने अपील दायर करते हुए कहा है कि जेल में रहने के दौरान उनके अच्छे बर्ताव और दूसरे कैदियों की मदद के सारे प्रयासों को ध्यान में नहीं रखा गया. स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट ने इनको माफी दिए जाने की याचिका पर सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है.

साल 2006 में 33 साल के सुकुमारन और 31 साल के चैन समेत नौ ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को बाली रिजॉर्ट से 8 किलो हेरोइन की तस्करी के जुर्म का दोषी पाया गया था. इन दोनों के अलावा बाकी दोषियों को 20 साल की जेल की सजा मिली. कोर्ट ने इन दोनों के अलावा नाइजीरिया, फ्रांस, इंडोनेशिया और घाना जैसे देशों के आठ अन्य ड्रग तस्करों को मौत की सजा सुनाई है. इन्हें मार्च में ही फांसी पर चढ़ाया जाना था लेकिन अब इस मामले में अदालती कार्यवाही के खिंचने से ऐसा होने की संभावना कम हो गई है.

ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से इंडोनेशिया पर इस बात का दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं कि किसी भी तरह मृत्युदंड को रोका जा सके. ऑस्ट्रेलिया ने इस मौके पर इंडोनेशिया को याद दिलाया है कि कैसे 2004 में हिंद महासागर में उठे सुनामी के कारण हुई तबाही से निबटने में उन्होंने उसकी मदद की थी. ऑस्ट्रेलिया ने इसके पहले दोनों देशों के बीच कैदियों की अदला बदली करने का भी प्रस्ताव दिया था.

सिडनी मॉर्निंग हैराल्ड में छपी रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप के पत्र में इन कैदियों के जीवन भर जेल में रहने का खर्च ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा उठाने की पेशकश है. कैदियों की अदला बदली के प्रस्ताव के बाद, इस खर्च उठाने वाले प्रस्ताव को भी इंडोनेशिया ने नकार दिया है.

इनके परिवार और दोस्तों का कहना है कि यह दोनों कैदी जेल के भीतर कई सुधारवादी कामों में लगे हैं. चैन धर्मिक सेवाओं से जुड़ा है तो वहीं सुकुमारन बाकी कैदियों को कला की शिक्षा दे रहा है. इसके अलावा, खुद ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार हुए ये दोनों कैदी अब बाकियों की ड्रग से छुटकारा पाने के कार्यक्रमों में मदद कर रहे हैं.

सऊदी अरब ने भी हाल ही में नशीले पदार्थ रखने के आरोप में तीन लोगों को मौत की सजा तामील की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि सऊदी अरब अपने पिछले साल के मौत की सजा के रिकार्ड को भी पार करता दिखाई दे रहा है.

आरआर/एमजे (एएपपी, डीपीए)

DW.COM