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दुनिया

मूर्ति बोले, भारतीय कंपनियां एच1बी वीसा से परहेज करें

एच-1बी वीजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख आईटी कंपनियों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है. इस बीच इन्फोसिस के नारायण मूर्ति ने भारतीय आईटी कंपनियों को एच1-बी वीजा का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है.

एच1-बी वीजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के फैसले ने जो बहस खड़ी की है उस पर आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने भी अपनी राय जाहिर की है. मूर्ति ने भारतीय आईटी कंपनियों को एच1-बी वीजा का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को अब स्थानीय लोगों को भर्ती करने पर गौर करना चाहिए.

मूर्ति के मुताबिक भारतीय कंपनियां हमेशा सरल विकल्प ही चुनती हैं क्योंकि इन कंपनियों के लिए मल्टीकल्चरल होना आसान नहीं है. भारत के आईटी उद्योग में अहम भूमिका निभाने वाले मूर्ति ने कहा, "जो कंपनियां अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन में काम कर रही हैं उन्हें स्थानीय लोगों को ही अपनी टीम में जगह देनी चाहिए तभी हम मल्टीकल्चरल बन सकेंगे". उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि अब कंपनियां एच1-बी वीजा का इस्तेमाल न करें और पेशेवरों को बाहर भेजना बंद कर दें.

एच-1बी वीजा पर ट्रंप का रुख आईटी कंपनियों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है. साथ ही एच1-बी वीजा धारकों के मेहनताने को दोगुना करने (60 हजार डॉलर्स से बढ़ाकर 1.30 लाख डॉलर्स) के संबंध से जुड़े प्रस्तावित बिल ने भी कंपनियों की परेशानियों को बढ़ा दिया है.

मूर्ति ने कहा अगर इस मसले पर एक्जिक्यूटिव ऑर्डर भी आता है तो भारतीय कंपनियों को इसे एक ऐसा मौका समझना चाहिए जो इन्हें मल्टीकल्चरल बनने का अवसर दे रहा है. अमेरिका सालाना 85 हजार एच-1बी वीजा जारी करता है, इसमें में 80 फीसदी भारतीय होते हैं. एच-1बी वीजा एक नॉन इमीग्रेंट वीजा है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को अपने यहां रख सकती हैं.

एए/वीके (पीटीआई)