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दुनिया

मूर्तिदेवी, बच्चों के लिए पैसा क्यों नहीं: कांग्रेस

कांग्रेस ने यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के इस बयान को आड़े हाथ लिया है कि शिक्षा के अधिकार के कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार के पास धन नहीं है और केंद्र को मदद देनी चाहिए. कांग्रेस ने मायावती को मूर्तीदेवी कहा.

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मायावती ने कहा, पैसा नहीं है

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "मुख्यमंत्री मूर्तिदेवी मायावती शिक्षा के अधिकार के कानून को लागू करने की अपनी सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला छाड़ रही हैं. यह एक घृणित प्रतिक्रिया है." उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार के पास मूर्तियों और स्मारकों पर खर्च करने के लिए तो पैसा है, लेकिन बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए नहीं है.

सिंघवी ने बताया कि वर्ष 2009-10 में राज्य सरकार के बजट में मूर्तियों और स्मारकों पर खर्च के लिए साढ़े चार हजार करोड़ रुपए अलग से रखे गए. इसके अलावा इन मूर्तियों और स्मारकों की रक्षा के लिए सुरक्षा बल की व्यवस्था में 67 करोड़ रुपये का बंदोबस्त किया गया. कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है, "इससे मायावती की सोच पता चलती है जो विकास, जनता और बच्चों के खिलाफ है. यह नकारात्मक सोच है."

सिंघवी ने बताया कि शिक्षा के अधिकार के कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार 55 प्रतिशत राशि मुहैया कराने के लिए वचनबद्ध है जिसके लिए 45 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होगी जो उत्तर प्रदेश के मामले में 8 हजार करोड़ के रुपये के आसपास बैठती है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शायद राज्य सरकार को इस बात का डर है कि लोग समझदार हो जाएंगे तो खमियाजा बीएसपी को उठाना पड़ सकता है. वह कहते हैं, "शायद मायावती चाहती हैं कि उत्तर प्रदेश निरक्षर बना रहे. राजनीति करने के लिए बहुत से मुद्दे हैं. बच्चों की शिक्षा को इसमें मत घसीटो."

मायावती ने शनिवार को प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर कहा कि शिक्षा के अधिकार के कानून को लागू करना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं होगा. इसलिए केंद्र सरकार को इस योजना के लिए धन मुहैया कराना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह धन की व्यवस्था न कर, इस कानून के व्यवहारिक पहलूओं की अनदेखी कर रही है.

सिंघवी ने मायावती की आचोलना करते हुए यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश साक्षरता, बीच में स्कूल छोड़ देना वाले बच्चों की संख्या, मातृत्व मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और अन्य कसौटियों के राष्ट्रीय औसत से पिछड़ रहा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एम गोपालकृष्णन

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