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विज्ञान

मूत्र से बनेगी बिजली

भारत में तो मूत्र के उपयोग के किस्से जगजाहिर हैं. अब ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने इसका इस्तेमाल कर मोबाइल फोन को रिचार्ज करने में सफलता पाई है.

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें मूत्र से ऊर्जा प्राप्त करने में कामयाबी मिली है और वे मोबाइल फोन को इतना चार्ज करने में सफल रहे हैं कि उसके जरिए टेक्स्ट संदेश भेजा जा सके और इंटरनेट सर्फ किया जा सके.

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी और ब्रिस्टल रोबोटिक्स लैब के रिसर्चरों ने कहा कि उन्होंने ऐसा ऊर्जा सेल तैयार किया है जो मूत्र के तत्वों को अलग कर उससे बिजली बनाने के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल करता है. इस संबंध में एक रिसर्च पेपर रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री की पत्रिका फीजिकल केमिस्ट्री केमिकल फीजिक्स में प्रकाशित की गई है.

Intersolar Messe 2013 in München

मूत्र से बिजली

इस रिसर्च के बारे में जानकारी देते हुए इंजीनियर इयोनिस इरोपुलुस ने कहा, "किसी ने मूत्र से ऊर्जा नहीं निकाली है, इसलिए यह एक रोमांचक खोज है." उनका कहना है कि ऊर्जा के इस नए स्रोत की खूबसूरती इस बात में है कि इसके लिए हवा या सूरज के अनिश्चित व्यवहार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, "हम दरअसल ऊर्जा बनाने के लिए काम में आ चुकी चीज का फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं."

मूत्र से ऊर्जा बनाने के लिए इयोनिस इरोपुलुस की टीम ने कार्बन फाइबर पर बैक्टीरिया उगाया और उसे चीनी मिट्टी के सिलिंडर में डाला. बैक्टीरिया ने सिलिंडर से भेजे गए मूत्र में उपलब्ध रसायन को अलग कर दिया और उससे थोड़ी मात्रा में बिजली पैदा हुई जिसे एक कंडेंसर में जमा किया गया. रिसर्चरों का मानना है कि कार की बैट्री के आकार वाले सेल को दूसरे कामों के लिए भी तैयार किया जा सकता है.

Handy Batterien Akkus

चार्ज हो सकेंगी बैटरियां

इरोपुलोस के अनुसार टीम का लक्ष्य कुछ ऐसा बनाना था जिसे आसानी से लाया ले जाया जा सके. नई खोज के फायदे के बारे में वह कहते हैं, "एक उत्पाद, जिसकी सप्लाई कभी न खत्म होने की हम उम्मीद कर सकते हैं, हमारा मूत्र है." माइक्रोबियल फुएल पावर स्टैक (एमएफसी) नामक नया सेल अब तक इतनी बिजली पैदा कर रहा है जिससे एसएमएस, वेब ब्राउजिंग और एक छोटा कॉल संभव है.

इरोपुलोस के अनुसार नई मशीन को टेस्ट कर लिया गया है और वह काम करता है, "अब हमारा काम इस प्रक्रिया को विकसित करना और बेहतर बनाना है ताकि हम एमएफसी को बैट्री को पूरी तरह चार्च करने के लायक बना सकें." रिसर्चरों की टीम को उम्मीद है कि भविष्य में इनका इस्तेमाल घरेलू उपकरणों को चार्ज करने के लिए किया जा सकेगा.

एमजे/एजेए (एएफपी)

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