1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मुस्लिम देशों के साथ सहयोग बढ़ाएगा यूरोप

पहले पेरिस फिर बेल्जियम हमलों के बाद यूरोप में आतंकवाद को ले कर चिंता का माहौल बना हुआ है. सुरक्षा के लिए चिंतित यूरोपीय संघ के नेताओं ने तय किया कि मुस्लिम देशों के साथ बेहतर सहयोग की जरूरत है.

default

ब्रसेल्स में जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर

ईयू के विदेश मंत्रियों ने अपनी बैठक में सीरिया और इराक से लौट रहे लड़ाकों से निपटने के लिए बेहतर रणनीति बनाने पर जोर दिया लेकिन आतंकवाद पर नया सख्त कानून बनाने की मांग को खारिज कर दिया है. 12 और 13 फरवरी को ब्रसेल्स में इस पर शिखर सम्मेलन में विचार होगा.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री फिलिप हैमॉन्ड ने कहा, "हम यूरोप को आतंकवाद की चपेट से बचाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम हर मुमकिन कदम उठाएंगे." पेरिस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर हुए हमले को 2005 में ब्रिटेन के मेट्रो स्टेशन पर हुए आतंकवादी हमले के बाद से अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है.

उधर इराक और सीरिया जैसे देशों से युद्ध का अनुभव कर लौट रहे चरमपंथियों पर असमंजस की रोशनी में यूरोपीय संघ के आतंकवाद विरोधी दस्ते के प्रमुख गिल दे केरशोव ने कहा, "हमें सिर्फ उन्हीं जिहादियों को जेल में भेजना है जिनके हाथों पर खून लगा है, बाकियों को पुनर्वास केंद्रों में." फ्रांस के यूरोप वन रेडियो से बात करते हुए उन्होंने कहा, "सबसे जरूरी है इंटरनेट और सोशल नेटवर्क पर निगरानी और उसका नियंत्रण."

फरवरी में होने वाले शिखर सम्मलेन में आतंकवाद के प्रसार में इंटरनेट की भूमिका पर चर्चा होगी. इन बातों पर ध्यान दिया जाएगा कि किस तरह मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में पुलिस को मदद मुहैया कराई जा सकती है, यूरोपीय संघ के नागरिकों को विदेश जा कर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और लौट कर अपने देश में हिंसा फैलाने से कैसे रोका जा सकता है और इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा के प्रचार पर कैसे काबू पाया जा सकता है.

यूरोपीय संघ की विदेश नीति सचिव फेडेरिका मोघेरिनी ने इस बारे में कहा, "खतरा सिर्फ उतना ही नहीं है जितना हमने पेरिस में देखा, यह दुनिया के कई हिस्सों में फैल रहा है और इसकी शुरुआत मुस्लिम देशों में हो रही है. हमें एक दूसरे के साथ और सूचना बांटनी होगी, हमें बेहतर सहयोग करना होगा." बैठक के दौरान अरब लीग के महासचिव नबील अल अराबी भी मौजूद थे. उन्हें संबोधित करते हुए फेडेरिका मोघेरिनी ने कहा, "हम महासचिव से इस पर चर्चा करेंगे कि अपने भागीदारों के साथ सहयोग कैसे बढ़ा सकते हैं. हमें सहबंध बनाने की, संवाद की जरूरत है."

जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर ने कहा कि पेरिस हमलों ने यूरोप और दुनिया को बदल कर रख दिया है, "हमें आज यह तय करने की जरूरत है कि अब हमें क्या करना है, हमें मुस्लिम देशों के साथ ज्यादा संपर्क साधने के बारे में भी सोचना होगा."

जर्मनी के ड्रेसडेन शहर में हर सोमवार होने वाली इस्लाम विरोधी पेगीडा रैली के लिए आज ड्रेसडेन प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी. पुलिस का कहना है कि रैली के दौरान हमले का खतरा है. वहीं पेगीडा समर्थकों ने भी शिकायत की है कि उनके नेता लुत्स बाखमन को इस्लामिक स्टेट (आईएस) से खतरा है. अक्टूबर से जर्मनी में हर हफ्ते इस तरह के विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं. पिछले सोमवार रिकॉर्ड 25 हजार लोग ड्रेसडेन की रैली में शामिल हुए. वहीं देश भर अलग अलग जगह पेगीड़ा के विरोध में करीब एक लाख लोग जमा हुए.

आईबी/एमजे (रॉयटर्स, एएफपी, डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री