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दुनिया

मुसलमानों से माफी को तैयारः बीजेपी

भारत में आम चुनाव नजदीक आने के साथ जहां बड़े गठबंधनों के लिए जोड़ तोड़ हो रही है, वहीं हिन्दू विचारधारा वाली बीजेपी ने मुसलमानों से माफी मांगने का वायदा किया है.

रामविलास पासवान जैसे धर्मनिरपेक्ष समझे जाने वाले नेताओं के साथ लाने की कोशिशों के बीच बीजेपी ने अब मुसलमानों की तरफ एक और कदम बढ़ाया है. राजधानी दिल्ली में मुसलमानों की एक सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "हम लोगों के पार्ट पर अगर कहीं गलती और चूक हुई होगी, तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि शीश झुका माफी मांगेंगे, सिर झुका कर हम क्षमा मांग लेंगे."

सिंह का कहना है कि मुसलमानों को एक बार बीजेपी पर भरोसा करना चाहिए और अगर वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते हैं, तो "फिर हमारी तरफ मत देखना". बीजेपी के कद्दावर नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में रहते हुए 2002 में गुजरात में भयानक दंगे हुए थे, जिसमें हजारों मुसलमान मारे गए थे. आरोप लगा कि मुख्यमंत्री मोदी ने अपने प्रशासन को छूट दे रखी थी कि वे इस दंगे को हवा दें. 10 साल की जांच के दौरान उन पर कई बार सवाल उठे और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें "आधुनिक युग का नीरो" बताया. लेकिन जांच रिपोर्ट में उन्हें बेकसूर घोषित किया गया है. राजनाथ सिंह ने इस ओर इशारा किया, "देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कह दिया कि जो बात कही जाती थी 2002 के बारे में गुजरात के बारे में, वह पूरी तरह से बेबुनियाद है, निराधार है. अब क्या चाहिए, क्या अदालत की बात भी आप मानने को तैयार नहीं."

Indien Rajnath Singh

राजनाथ सिंह के साथ नरेंद्र मोदी

मोदी इस दंगे के बारे में बात नहीं करना चाहते और बार बार कहे जाने के बाद भी उन्होंने इस मुद्दे पर कभी माफी नहीं मांगी है. यहां तक कि इस बारे में कुछ पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा, तो वह इंटरव्यू बीच में छोड़ कर उठ गए. मोदी शुरू से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य रहे हैं और उन पर कट्टर हिन्दुत्ववादी होने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने इस बात की भी सफाई देने की कोशिश की, "हमारा पीएम कैंडिडेट बार बार कहता है, बार बार... कि हमारा धर्म क्या है. तो मैं कहूंगा कि संविधान हमारा धर्म है."

बीजेपी का दावा है कि भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी भारतीय जनता इस बार बदलाव चाहती है और वह मोदी को प्रधानमंत्री चुनने के लिए तैयार है. हालांकि उनकी छवि को लेकर बीजेपी को कुछ वर्गों से दिक्कत आ रही है और वह एक एक कर इस मुश्किल को हल करने की कोशिश कर रही है. इसी सिलसिले में सोमवार को उसने लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान को भी साथ लाने की कोशिश की है, जो 2002 के दंगों के बाद धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ही बीजेपी के गठबंधन से अलग हुए थे. हालांकि खुद पासवान ने अभी इस बात की घोषणा नहीं की है.

एजेए/एमजे (पीटीआई)

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