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दुनिया

मुश्किल के बीच दक्षिण कोरिया में चुनाव

दक्षिण कोरिया की कमान संभालने को आतुर दो दिग्गज नेताओं की जंग में देश ने मंगलवार को वोटरों को लुभाने की भरपूर बेचैनी देखी. इस बार का चुनाव देश की बागडोर पहली बार किसी महिला को भी सौंप सकता है.

बुधवार को चुनाव में जीत चाहे जिसकी हो, चुनौतियों की पूरी कतार उसके माथे पर बल डालने के लिए तैयार खड़ी है. एक तरफ फुंफकार भरता उत्तर कोरिया है तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार. इन सब से पार पाए तो दुनिया के सबसे तेजी से बूढ़ी होती आबादी वाले देशों में शामिल दक्षिण कोरिया के कंधे पर बुजुर्गों की सेवा पर बढ़ते खर्च का बोझ. आंकड़े बता रहे है कि कोरियाई परिवार 2008 में आर्थिक संकट से ठीक पहले कर्ज में डूबे अमेरिकी लोगों की तुलना में फिलहाल ज्यादा बड़े कर्जदार हैं.

सत्ताधारी रूढ़िवादी पार्टी की उम्मीदवार पार्क ग्वेन हाई देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में इतिहास लिखने को बेचैन हैं. देश और राजनीति में पुरुषों के प्रभुत्व वाले देश में यह आसान नहीं लेकिन कोरिया के पूर्व तानाशाह की बेटी होना उनकी बड़ी ताकत है. 60 साल की पार्क आधुनिक कोरिया में ध्रुवीकरण के माहिर और कभी देश के तानाशाह रह चुके पार्क चुंग ही की बेटी हैं. पार्क चुंग ही के 18 साल के शासन में दुनिया ने दक्षिण कोरिया को एक तरफ लंबे समय से चली आ रही गरीबी के चंगुल से बाहर निकलते देखा है तो दूसरी तरफ विरोधियों का क्रूरता के साथ दमन करते हुए भी देखा.

Präsidentschaftswahl Südkorea 2012

पार्क ग्वेन हाई

1979 में चुंग के ही खुफिया प्रमुख ने उनकी गोली मार कर हत्या कर दी. चुंग की मौत से पांच साल पहले एक उत्तर कोरियाई बंदूकधारी ने उनको निशाना बनाने के चक्कर में पार्क की मां को गोली मार दी थी.

पार्क और राष्ट्रपति भवन ब्लू हाउस के बीचे में उदारवादी मून जे खड़े हैं जो देश के प्रमुख विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार हैं. पहले मानवाधिकार मामलों के वकील रह चुके मून जे पार्क के पिता के शासन में सत्ता का विरोध करने के लिए जेल भी जा चुके हैं. सबसे आखिरी सर्वे के नतीजे बता रहे हैं कि मून ने छोटी ही सही लेकिन पार्क से साफ तौर पर बढ़त ले ली है. हालांकि इस सर्वे के बाद भी चुनाव प्रचार जम कर हुआ है और माना जा रहा है कि नतीजे का फासला नजदीकी होगा और यह सर्वे से अलग भी हो सकता है.

दोनों उम्मीदवारों ने अपने अपने रूढ़िवादी और उदार वोटरों को अपने पक्ष में पक्का करने के बाद चुनाव के लिहाज से अहम मध्यमार्गी वोटरों को को लुभाने की भरपूर कोशिश की है और इसका नतीजा नीतियों में घालमेल के रूप में नजर आ रहा है.

दोनों उम्मीदवार आर्थिक लोकतंत्र की बात कर रहे है. दक्षिण कोरिया के लिए इसका मतलब है तेज आर्थिक विकास के कारण समाज में आई असमानता को दूर करना. इसके साथ ही नई नौकरियां पैदा करने और सामाजिक लाभ के कामों में खर्च बढ़ाने का वादा भी दोनों की जुबान पर है. मून अपने वादों में थोड़े ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं और बड़े पारिवारिक कारोबारों की कमान सरकार के हाथ में लेने के प्रस्ताव पर खासा ध्यान दे रहे है. देश की अर्थव्यवस्था एक तरह से इन्हीं कारोबारियों की मुट्ठी में है.

दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के साथ संपर्क बढ़ाने की बात की है लेकिन पार्क का रुख ज्यादा चौकसी से भरा है.

मून पड़ोसी देश के लिए बिना शर्त सहायता कार्यक्रम लागू करने के पक्ष में हैं और जितनी जल्दी हो सके उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ मुलाकात करना चाहते हैं. कोरियाई देशों का आपसी संबंध चुनाव प्रचार में मुख्य मुद्दा नहीं है लेकिन पिछले हफ्ते उत्तर कोरिया के रॉकेट परीक्षण ने इस बात की याद ताजा की है कि सीमा पार से एक जोखिम है जो किसी भी वक्त सिर उठा सकता है.

चुनाव से पहले टीवी पर आखिरी भाषण में पार्क ने अपने पिता के समान नेतृत्व देने की बात कही और देश को आर्थिक संकट से उबारने का भरोसा दिया है. पार्क ने कहा, "मेरे पास कोई परिवार नहीं जिसका मुझे ख्याल रखना हो, न ही बच्चे हैं जिन्हें अपनी संपत्ति देनी है. आप सब लोग मेरे परिवार हैं और आपकी खुशी के लिए ही मैं राजनीति में हूं. जिस तरह कोई मां अपना जीवन परिवार के लिए समर्पित करती है, मैं भी राष्ट्रपति बनूंगी और आप में से हर एक का ख्याल रखूंगी."

मून इस मौके पर भी थोड़े ज्यादा आक्रामक नजर आए और उन्होंने पार्क की सत्ताधारी न्यू फ्रंटियर पार्टी को भ्रष्ट और अक्षम बताया. मून ने लोगों से बड़ी संख्या मे वोट देने की अपील करते हुए कहा, "अगर आप उन्हें सजा नहीं देंगे तो पुरानी गलतियां आगे बढ़ेंगी. हमें लाठी उठानी है और कल(बुधवार) का दिन इसके लिए बेहद अहम है. "

मुन युवाओं में लोकप्रिय हैं जबकि पार्क स्वाभाविक रूप से बुजुर्गों की पसंद हैं. यह वो लोग हैं जो रूढ़िवादी हैं और खासतौर से उनके पिता को पसंद करते हैं. देश में करीब चार करोड़ वैध मतदाता है. बुधवार को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक चुनाव डाले जाएंगे. विजेता फरवरी में देश की सत्ता संभालेगा.

एनआर/एजेए (रॉयटर्स, एएफपी)

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