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मनोरंजन

मुल्तानी मिट्टी से निखरेगी ताज की त्वचा

दुनिया भर में मोहब्बत करने वालों के लिए बेमिसाल प्रेम की निशानी ताजमहल के बदन पर पड़े धब्बों को मिटाने के लिए मुल्तानी मिट्टी की लेप किया जाएगा. भारतीय पुरातत्व संस्थान ताज की चमक बनाए रखने की कोशिश में जुटा है.

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17वीं सदी में बने ताज की बाहरी दीवारों पर धूल और प्रदूषण के कारण हल्के धब्बे पड़ गए हैं. अपनी चमक के लिए दुनिया भर में विख्यात ताज की आभा थोड़ी धुंधली पड़ी है. भारतीय पुरातत्व संस्थान (एएसआई) इसकी चमक वापस लौटाने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए ताजमहल की दीवारों पर मुल्तानी मिट्टी का लेप किया जाएगा. इसके बाद पूरी इमारत को साफ पानी से धोया जाएगा.

एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी एमके समाधिया ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "हम ताजमहल का मड फेशियल करने जा रहे हैं. इससे धूल और दूसरी गंदगियों की सफाई हो जाएगी. हमने ताजमहल के बगल में मौजूद ताज मस्जिद में यह काम पहले ही कर लिया है." समाधिया ने बताया कि ताजमहल की खूबसूरती को निखारने की मुहिम करीब पांच साल पहले शुरू हुई. सबसे पहले मेहमानखाना और इसके दूसरे हिस्सों पर काम शुरू किया गया.

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ब्यूटी पार्लरों में मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल त्वचा निखारने के लिए खूब होता है. अब यही मिट्टी ताजमहल की दीवारों की चमक लौटाएगी. समाधिया ने बताया," यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है. हमें मिट्टी के घोल का पीएच एक खास स्तर पर बनाए रखना होगा ताकि वह ना तो ज्यादा अम्लीय हो और ज्यादा न क्षारीय." मिट्टी का लेप लगाने के बाद इसे पॉलीथीन की चादर से ढक दिया जाएगा ताकि मिट्टी दीवारों पर मौजूद तत्वों को सोख सके. इस मिट्टी की खासियत होती है कि ये धूल और गंदगी को सोख लेती है. एक बार ये काम हो जाएगा, तब इसे साफ पानी से धोकर साफ कर लिया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि इस साल अप्रैल तक ये काम शुरू हो जाएगा.

मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में सत्रवहीं सदी में ताजमहल बनवाया. दुनिया भर में इसे मोहब्बत की बेमिसाल निशानी के रूप में लोगों ने अपने दिल में बसा रखा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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