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दुनिया

मुर्सी के विशेषाधिकार को अदालत की चुनौती

मिस्र की एक अदालत ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के विशेषाधिकार संबंधी विधान को चुनौती दी. अदालत चार दिसंबर को तय करेगी कि राष्ट्रपति की इतनी शक्तियां वैध हैं या अवैध. मिस्र में मुर्सी के खिलाफ बड़े प्रदर्शन शुरू हुए.

मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी मेना ने कहा है कि अदालत मुर्सी के खिलाफ एक कदम आगे बढ़ चुकी हैं. समाचार एजेंसी एएफपी ने मेना का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट दी है. रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र की प्रशासनिक अदालत ने कहा है कि वह 4 दिसंबर को मुर्सी के विशेषाधिकार संबंधी विधान पर फैसला करेगी. उसी दिन पता चलेगा कि यह वैध है या नहीं. स्टेट काउंसिल के उप प्रमुख अब्देल मेगुइद अल मोकनन ने बताया कि मुर्सी के खिलाफ 12 मुकदमें दायर हुए हैं.

कानूनी दांव पेंचों से दूर मिस्र के कई शहरों में फिर से अशांति फैलने लगी है. स्वास्थ मंत्री के मुताबिक राष्ट्रपति के खिलाफ ताजा प्रदर्शनों में दो लोगों की मौत हुई है. मुर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई हिंसा में 44 लोग घायल हुए. मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के नेता मुर्सी ने बीते गुरुवार को कुछ विशेषाधिकार संबंधी विधान बनाए. इस विधान के विरोध में मिस्र के मुर्सी के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं. नागरिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल मुर्सी पर तानाशाही का आरोप लगा रहे हैं.

बीते साल अरब वसंत के दौरान हुस्नी मुबारक को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा. पूर्व सैन्य अधिकारी मुबारक 30 साल तक राष्ट्रपति पद पर रहे. मुबारक के जाने के बाद सेना ने देश की कमान संभाली लेकिन काहिरा की तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए. लंबे प्रदर्शन के इस साल मई-जून में देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए. लोगों को लगा कि क्रांति के बाद यह चुनाव देश को लोकतंत्र की राह पर ले जाएगा. चुनाव में मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के मुर्सी को 51 फीसदी वोट मिले.

जुलाई में सत्ता संभालने के बाद मुर्सी ने नई संविधान सभा का गठन किया. लेकिन 22 नवंबर को मुर्सी ने कुछ ऐसे नियम बना दिए कि बात बिगड़ गई. नए नियमों के मुताबिक राष्ट्रपति मिस्र के कानून से ऊपर होंगे. उनके फैसले हर न्यायपालिका के दायरे से बाहर होंगे. बीते शुक्रवार से मिस्र में मुर्सी के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया. अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी मुर्सी के इन कदमों की आलोचना की.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के पूर्व प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बरादेई भी मुर्सी के खिलाफ खुलकर खड़े हो गये. अल बरादेई ने विपक्षी पार्टियों की भांति मुर्सी पर तनाशाही का आरोप लगाया. राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध में जज भी उतर आए. जजों ने कामकाज के बहिष्कार की चेतावनी दे दी.

बढ़ते दबाव के बीच रविवार को मुर्सी एक कदम पीछे हठते दिखे. मुर्सी ने कहा कि विशेषाधिकार संबंधी विधान अस्थायी हैं. इन्हें कुछ समय बाद खत्म कर दिया जाएगा. टकराव को टालने की कोशिश में मुर्सी ने सोमवार को सर्वोच्च अदालत के जजों से मुलाकात करने का समय तय किया.

ओएसजे/ एमजी (डीपीए, एएफपी)

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