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दुनिया

मुंबई के मनचलों को हत्या के लिए उम्रकैद

पांच साल पहले मुंबई के अंधेरी इलाके में दो दोस्तों की इसलिए हत्या कर दी गई थी कि वे अपनी गर्ल फ्रेंड्स को छेड़छाड़ से बचाना चाहते थे. अब अदालत ने चार अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

लगभग साढ़े चार साल पहले अपनी दोस्तों के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर कीनन सैंटोस और उनके दोस्त रूबेन फर्नांडीज की हत्या मुंबई के संभ्रांत समझे जाने वाले पश्चिमी उपनगर अंधेरी में कर दी गयी थी. मुंबई के सेशन कोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने चारों को हत्या के साथ महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्र व्यवहार का भी दोषी मानते हुए दो साल की अलग सजा भी सुनाई.

सुर्खियों में रहा है यह केस

मुंबई में अंधेरी के अंबोली इलाके में 20 अक्टूबर 2011 की शाम को 24 साल के कीनन सैंटोस और उनके 29 वर्षीय दोस्त रूबेन फर्नांडीज की हत्या सुर्खियों में आई थी. एक रेस्तरां में डिनर करने के बाद ये लोग पास ही के एक पान की दुकान पर गए. तभी आरोपियों जीतेंद्र राणा, सुनील बोध, सतीश धुलज और दीपक तिवाल ने उनकी दोस्तों के साथ छेड़खानी की.

पुलिस के मुताबिक कीनन और रूबेन ने छेड़खानी का विरोध किया. इस वजह से आरोपियों और कीनन-रूबेन के बीच कहासुनी हुई. कुछ देर बाद आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ दोनों पर चाकुओं से हमला बोल दिया. इस हमले में कीनन की मौत उसी वक्त हो गई, जबकि रूबेन ने 10 दिन बाद अस्पताल में दम तोड़ा.

फैसले पर संतोष

कोर्ट के फैसले पर संतोष जताते हुए कीनन के पिता वैलेरियन सैंटोस ने कहा, "मैं उम्रकैद की सजा से खुश हूं. इन्हें हर पल कीनन-रूबेन के बारे में सोचते हुए जीना चाहिए." हालांकि वैलेरियन सैंटोस न्याय पाने में लगे समय को लेकर उतने खुश नहीं हैं. उनके अनुसार यह वक्त उनके परिवार के लिए तकलीफदायक रहा है. कीनन के भाई शेल्डन सैंटोस ने कहा कि हम लोग बहुत खुश हैं कि आरोपियों के लिए जिस सजा के बारे में हम सोच रहे थे कोर्ट ने उन्हें वही सजा दी. कीनन का परिवार इस मामले के दोषियों को मौत की सजा दिए जाने के पक्ष में नहीं था.

इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. निकम ने कहा, "मामला हत्या के साथ दो महिलाओं के सम्मान और गरिमा से भी जुड़ा था. हमने कोर्ट से अपील की थी कि समाज को कड़ा संदेश मिले, इसके लिए चारों दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए."

फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई सुनवाई

इस हत्याकांड पर सोशल मीडिया में हुई तीखी प्रतिक्रिया और घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मामले को मार्च 2012 में फास्ट ट्रैक कोर्ट के हवाले कर दिया था. 2013 में रोजाना सुनवाई शुरू हुई, लेकिन फिर मामला महिला कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस ने इस सिलसिले में चार लोगों को हत्या के आरोप में और 17 लोगों को दंगा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस मामले में चारों आरोपियों के सम्बन्ध में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सारे आरोपों को मान लिया. उन पर हत्या के साथ महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्र व्यवहार का दोष भी शामिल है.

इस हत्याकांड पर देशभर में खासकर अंबोली इलाके में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी. अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और जान गवां देने पर कीनन-रूबेन को खूब सराहना मिली और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स में अभियान भी चले. मीडिया में अपराध की आलोचना और आरोपियों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई करने की मांग पर पुलिस ने भी मुस्तैदी दिखायी. महिलाओं के साथ आए दिन बदसलूकी की घटनाएं होती रहती हैं. मूक दर्शक भीड़ ने अपराधियों का हौसला इतना बढ़ा दिया है कि वह सरेआम महिलाओं के साथ छेड़छाड़ से नहीं डरते. कीनन-रूबेन के मामले में भी ऐसा ही हुआ. झगड़े के दौरान करीब 50 लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन मदद के लिए कोई सामने नहीं आया.

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