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दुनिया

मुंबई एयरपोर्ट का नया चेहरा

करीब दो अरब डॉलर की लागत से मुंबई के हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल का उद्घाटन कर दिया गया है. यह कदम भारी भीड़ से निपटने और हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाया गया.

आस पास झुग्गियों से घिरे मुंबई के छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डे का काम दो साल देर से पूरा हो पाया है और इसके बजट में करीब 25 फीसदी का इजाफा करना पड़ा. काम में राजनीतिक अड़चनें, आरोप प्रत्यारोप के अलावा करीब 300 एकड़ जमीन को फिर से कब्जे में लेने की दुश्वारियां पेश आईं, जो हवाई अड्डे के आस पास थीं और जहां लोग रह रहे थे.

हवाई अड्डे को सार्वजनिक और निजी कंपनियों ने मिल कर तैयार किया है. जीवीके ग्रुप ने इस काम को देखा है. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट संजय रेड्डी का कहना है, "हम न सिर्फ यह काम कर सकते हैं, हम यह काम बेहतर कर सकते हैं." काम होने के बाद यह पूरा एयरपोर्ट काफी हवादार दिख रहा है, इसमें जगह जगह हरियाली भी नजर आ रही है और भारतीय कला के 7000 नमूने हैं.

एक्स जैसी इमारत

चार मंजिला इमारत के अराइवल और डिपार्चर गेटों के बीच करीब तीन किलोमीटर की लंबी दीवार है. इन पर जड़े भारतीय कला के नमूने खास तौर पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. चेक इन वाले 11 एकड़ के इलाके में सफेद छत के बीच दर्जनों रोशनी के स्रोत दिख रहे हैं, जिनसे भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर की तरह की छवि बन रही है. इसके अलावा टर्मिनल पर खास झूमर भी लगाए गए हैं.

मुंबई एयरपोर्ट ने दावा किया है कि उनका हवाई अड्डा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्टों में शामिल होगा, जहां से सफर करने से मुसाफिर को आनंद आएगा. सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को हफ्ते भर में नए टर्मिनल से उड़ाया जाएगा. संभावना है कि इसी इमारत के निचले तल से घरेलू विमानों की उड़ान संभाली जाएगी. हो सकता है कि इस काम में साल भर का वक्त लग जाए. इसके लिए पहले मौजूदा घरेलू टर्मिनल को तोड़ना होगा और अंग्रेजी के एक्स अक्षर की तरह एयरपोर्ट इमारत की आखिरी तस्वीर बनेगी.

Chhatrapati Shivaji International Airport Mumbai Indien

दो अरब डॉलर की लागत से बना टर्मिनल

झुग्गियों से मुश्किल

मुंबई की आबादी करीब दो करोड़ 10 लाख है और इसकी 60 फीसदी आबादी झुग्गियों में रहती है. इसकी वजह से आर्थिक राजधानी का दर्जा पाने के बावजूद कई जगहों पर विकास की गति धीमी हो जाती है. इसके अलावा राजनीतिक गतिरोध भी पैदा होते रहते हैं. सत्रहवीं सदी की एक मूर्ति को हटा कर दूसरी जगह लगाने के मुद्दे ने खूब तूल पकड़ा. हालांकि बाद में इस पर समझौता हो गया. झुग्गीवालों से 300 एकड़ की जमीन लेना भी आसान काम नहीं था, जहां 75000 लोग रह रहे थे. एयरपोर्ट के आस पास करीब दो लाख लोग झुग्गियों में रहते हैं. एयरपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि फिलहाल सिर्फ 100 परिवारों को ही दूसरा ठिकाना दिया जा सका है.

झुग्गीवालों का कहना है कि उन्होंने अपने हाथों से झुग्गियों का निर्माण किया है और दशकों से वहां रह रहे हैं, "इसलिए वह नहीं हटेंगे." यहीं रह रहे सचिन चंद्रकांत निम्बालकर का कहना है, "नया एयरपोर्ट बनाने से गरीबों की समस्या हल नहीं होगी." वह 10X20 फुट की कोठरी में रहते हैं, जहां टॉयलेट भी नहीं है.

इस प्रोजेक्ट में इतना वक्त लग गया कि एयरपोर्ट के मामले में मुंबई राजधानी दिल्ली से पिछड़ गया. नई दिल्ली ने भी अपने हवाई अड्डे को नई शक्ल दी है, जहां पिछले साल करीब 3.4 करोड़ यात्री गए. इसकी तुलना में मुंबई में सिर्फ तीन करोड़ यात्री ही गए. दिल्ली का नया एयरपोर्ट 2006 में शुरू हुआ. हालांकि मुंबई को उम्मीद है कि पांच साल के अंदर वहां से चार करोड़ यात्री उड़ान भरने लगेंगे.

एजेए/एमजे (एपी)

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