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विज्ञान

मीट के बजाए अब कीड़ों से बनेंगे व्यंजन!

मांसाहारी भोजन पसंद करने वाले लोग चिकन और मटन से बने खाने को दिलोजान से चाहते हैं लेकिन कीड़ों से बने मांसाहारी खास व्यंजनों के नाम से ही उन्हें पसीना छूट रहा है. हालांकि एक प्रोफेसर इसे पौष्टिक खाना मानते हैं.

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कीड़ों से बना स्प्रिंगरोल और टिड्डों का चॉकलेट में इस्तेमाल..सुन कर ही मन खराब सा होने लगता है लेकिन नीदरलैंड की वागनइंगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आर्नोल्ड फान हुईस का कहना है कि कीड़ों में पशुओं की तुलना में ज्यादा प्रोटीन होते हैं, उन्हें बनाने में खर्चा भी कम होता है. इसलिए उन्हें खाने की कोशिश करना चाहिए.

"बच्चों को कीड़े खाने में मुश्किलें पेश नहीं आती लेकिन वयस्कों की खानपान की आदतें अलग होती हैं. चखकर और थोड़े अनुभव के बाद ही वह अपने खाने के प्रति अपना विचार बदलते हैं. यह मामला मनोविज्ञान से जुड़ा हुआ है."

फान हुइस ने कई लेक्चर दिए हैं, ऐसे समारोह आयोजित किए जिसमें लोगों को कीड़ों से बने व्यंजनों को चखने का अवसर मिला. वह मास्टर शेफ के रूप में लोगों को दिखा चुके हैं कि कीड़ों, टिड्डों और खटमलों से कौन से व्यंजन तैयार हो सकते हैं.

Ameise in Nahaufnahme

कीड़ों से बने खाने को पसंद करने वालों को आकर्षित करने के लिए फान हुइस के नेतृत्व में उनकी टीम स्थानीय कुकिंग स्कूल में काम कर रही है. उन्होंने एक व्यंजन किताब तैयार की है जिसमें कई जानकारी दी गई हैं. शेफ हेन्क फान गुर्प ने ऐसे कई व्यंजन तैयार किए हैं जिसमें अंडे और आलू में कीड़े मिलाकर पैनकेक जैसा कीश तैयार किया जाता है. इसके अलावा चॉकलेट में कीड़े भी मिलाए जाते हैं. फान गुर्प यह छिपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं करते कि व्यंजनों में क्या मिलाया गया है. वह बताते हैं कि ऐसे खाने में प्रोटीन की भरमार है.

गुर्प बताते हैं कि वह अपना खाना इस तरह से तैयार करते हैं कि लोग देख सकें कि वह क्या खाने जा रहे हैं. एक बार अंतरराष्ट्रीय शेफ इस खाने को बनाना शुरू कर दें, अन्य लोग भी इसे बनाना शुरू कर देंगे.

थाइलैंड और वियतनाम सहित कई एशियाई देशों में टिड्डों को स्वादिष्ट स्नैक माना जाता है लेकिन नीदरलैंड्स में उन्हें आमतौर पर मेन्यू में जगह नहीं मिल पाती. फान हुइस का कहना है कि यूरोपीय लोगों को प्रोटीन के लिए कीड़ों को खाने की सोचनी चाहिए क्योंकि इनमें 90 फीसदी तक प्रोटीन होता है जबकि गोमांस में यह मात्रा सिर्फ 40 से 70 फीसदी होती है. "2000 की तुलना में 2050 में मीट की खपत दोगुनी हो जाएगी."

हुइस के मुताबिक पशुओं के रखरखाव के लिए 70 फीसदी कृषि योग्य भूमि का इस्तेमाल हो रहा है और इससे ज्यादा हम नहीं कर सकते. पशुओं को पालन पोषण करने में 18 फीसदी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है. इसके विपरीत नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी के पास एक फार्म में पक्षियों, छिपकलियों और बंदरों के लिए कीड़ों को पाला जा रहा है और अब लोगों के खाने में उनका इस्तेमाल हो सकता है. "यह अच्छा खाना है, पौष्टिक है और उम्रदराज लोगों की सेहत के लिए अच्छा है."

लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी लोग इस खाने में अपने स्वास्थ्य का फायदा देख रहे हैं. कुछ लोगों को यह स्वीकारने में मुश्किल हो रही है कि इस खाने को कैसे खाया जा सकता है और उन्हें कीड़ों को खाने के नाम से ही कंपकंपी छूट रही है. ऐसी ही एक महिला का कहना है कि शुरुआत में उन्हें डर लग रहा था, इसका स्वाद भी आम भोजन, मीट, चिकन, सब्जी जैसा नहीं है और वह इसे दोबारा नहीं खाएंगी. लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो यह साहसिक कदम उठाने के लिए तैयार हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ओ सिंह

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