मीट की कमी से जूझता उत्तर प्रदेश | दुनिया | DW | 27.03.2017
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दुनिया

मीट की कमी से जूझता उत्तर प्रदेश

देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश इन दिनों मांस की किल्लत से जूझ रहा है. सत्ता परिवर्तन के साथ राज्य में पैदा हुई मांस की कमी से कारोबारी और आम जनता परेशान दिखायी दी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत का सबसे ज्यादा फौरी असर राज्य के बूचड़खानों पर नजर आ रहा है. सरकार ने गैरकानूनी बूचड़खाने और मांस की दुकानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राज्य के नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गौरक्षा कानून का बड़ा समर्थक माना जाता है और सार्वजनिक रूप से कई मौकों पर उन्होंने गौमांस के इस्तेमाल का विरोध किया है. गाय को मारने और इसका मांस खाने की हिंदू धर्म में मनाही है. उत्तरप्रदेश समेत अधिकतर राज्यों में गौमांस वर्जित भी है.

अपने गृहनगर गोरखपुर में रविवार को एक रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अधिकतर दुकानें और बूचड़खाने लाइसेंस और सरकार की मंजूरी के बिना चल रही हैं. आदित्यनाथ, पूर्वी उत्तरप्रदेश स्थित गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं. उन्होंने कहा कि कई बूचड़खानों में भैंसों के नाम पर गायों का मारा जा रहा है और इसे बंद होना चाहिये. हालांकि अब तक ऐसे बूचड़खानों का कोई मामला सामने नहीं आया है, जहां भैस के मांस के नाम पर गाय का मांस बेचा जा रहा हो. लेकिन सरकारी अधिकारी ऐसे बूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद करा रहे हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है या जिनकी कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. अधिकारियों की इस कार्रवाई के विरोध में राज्य के मांस विक्रेताओं ने दुकानों को बंद रखा जिसके चलते राज्य में मांस की कमी नजर आ रही है.

उत्तर प्रदेश की कुल आबादी तकरीबन 20 करोड़ है, साथ ही यह देश का सबसे बड़ा मांस उत्पादक राज्य भी है. राज्य के 41 बूचड़खानों के पास लाइसेंस हैं. वहीं तमाम अन्य अवैध बूचड़खाने प्रशासन के साथ साठगांठ करके या घूस देकर चलाये जा रहे हैं. राज्य को इस कारोबार से हर साल करीब 110 अरब रुपये की कमाई होती है. बीजेपी के राज्य महासचिव विजय बहादुर पाठक ने कहा, "हम जानते हैं कि यह सरकार की आमदनी का बहुत बड़ा जरिया है लेकिन पार्टी ने जनता से वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वह गैरकानूनी बूचड़खानों पर लगाम कसेगी." उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव के दौरान किये गये वादे निभाने के लिये प्रतिबद्ध है. लखनऊ में मांस की दुकान चलाने वाले अकील अहमद ने कहा कि उनके पास लाइसेंस हैं लेकिन फिर भी उन्होंने अन्य कारोबारियों के समर्थन में दुकान बंद रखी है. हालांकि तमाम दुकानदार कागजी कार्रवाई पूरी करने में भी जुटे हुये हैं.

वहीं मांस कारोबारियों के संगठन कुरैशी महासभा के एक अधिकारी नियाज कुरैशी सरकार के इस कदम को अनुचित बताते हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी लोगों को परेशान कर रहे हैं. लाइसेंस देने के नाम कर रिश्वत वसूल रहे हैं.

वहीं बाजार में मांस की कमी के चलते कई दुकानें और रेस्त्रां भी बंद रहे तो वहीं कुछ ने अपने मेनू को बदल दिया. लखनऊ शहर की मशहूर दुकान टुंडई कबाब के मालिक रईस अहमद ने बताया कि उनके पास भैंस के मांस की कमी हो गई है इसलिये उन्हें जबरन ही चिकन और मटन के कबाब बेचने पड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे ग्राहक खुश नहीं है लेकिन हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है.

मसला सिर्फ इंसानों के भोजन तक ही सीमित नहीं है बल्कि जानवर भी इससे परेशान नजर आ रहे हैं. कानपुर के चिड़ियाघर ने राज्य सरकार को संदेश भिजवाया है कि शेर, बकरी के मांस खाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है. कुछ ऐसी ही शिकायत इटावा से भी आ रही हैं.

एए/आरपी (एपी)

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