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दुनिया

मिस्र में नए संविधान पर जनमत संग्रह

मिस्र में संवैधानिक जनमत संग्रह के लिए मतदान हो रहा है. देश के पहले स्वतंत्र चुनावों में निर्वाचित इस्लाम समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी का सेना द्वारा तख्ता पलटे जाने के बाद यह पहला मतदान है.

सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फतह अल सिसी ने पिछले साल जुलाई में मुर्सी को उनके पद से हटा दिया था और गिरफ्तार कर लिया था. सिसी के इस्लामी कट्टरपंथी विरोधी उन्हें सैन्य तख्तापलट का मास्टरमाइंड मानते हैं, जिसकी वजह से देश में इतिहास का सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आलोचकों का कहना है कि उसकी वजह है देश में पुलिस राज का वापस लौट आना.

बहुत कम लोगों को इस बात में संदेह है कि मुर्सी के खिलाफ उन्हें हटाए जाने से पहले भारी प्रदर्शन करने वाले मिस्र के लोग बड़ी तादाद में जनमत संग्रह में भाग लेंगे और उसका समर्थन करेंगे. यह जनमत संग्रह सेना समर्थित सरकार के राजनीतिक रोडमैप के लिए मील का पत्थर है. दूसरी ओर बहुत से लोग 2011 में होसनी मुबारक के खिलाफ जन प्रदर्शनों के बाद से देश में आए राजनीतिक उथलपुथल और आर्थिक बदहाली से घबराए हुए हैं. वे सिसी में ऐसी शख्सियत देखते हैं जो स्थिरता बहाल कर सकता है.

जीतने की उम्मीद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनमत संग्रह सेनाप्रमुख की लोकप्रियता मापने का मतदान भी साबित हो सकता है, जिनके पोस्टर राजधानी काहिरा में हर जगह देखे जा सकते हैं. यदि सिसी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ते हैं तो उनके जीतने की उम्मीद की जा रही है. जनमत संग्रह में खासकर महिलाओं का समर्थन भी दिख रहा है. नाइल डेल्टा में स्थित शहर टांटा में मतदान के लिए महिलाओं की भीड़ दिखी. 30 वर्षीया शिक्षिका नेगला हसन कहती हैं, "संविधान का स्वीकार किया जाना दिखाएगा कि हमने 30 जून को महान क्रांति की जो जनता की इच्छा पर सेना ने पूरी की."

सैनिक तख्तापलट का समर्थन करने वाले मिस्रवासी इसे क्रांति कहते हैं. उनका कहना है कि यह मुर्सी के शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बाद लोगों की मांग पर हुआ. नेगला हसन कहती हैं, "हमने ब्रदरहुड को हटा दिया है और हम अपनी पुलिस और सेना के साथ स्थिरता और सुरक्षा में रहेंगे."

लेकिन मिस्र के राजनीतिक बदलाव में बाधाएं बनी रहेंगी. अल कायदा से जुड़े इस्लामी उग्रवादियों ने मुर्सी को हटाए जाने के बाद से सुरक्षा बलों पर हमलों में तेजी ला दी है. अधिकारियों का आरोप है कि उनका मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ निकट संबंध है. ब्रदरहुड ने बार बार कहा है कि वह शांतिपूर्ण आंदोलन है और उसे उम्मीद है कि सड़कों पर हो रहा प्रदर्शन सरकार और सेना में उसके सहयोगियों को हटाने में कामयाब रहेगा.

संविधान में बदलाव

यह जनमत संग्रह होस्नी मुबारक हो हटाए जाने के बाद तीसरा मौका है जब मिस्र के नागरिक संविधान में बदलाव पर अपनी राय दे रहे हैं. नया संविधान उस संविधान की जगह लेगा जिसे एक साल पहले हुए जनमत संग्रह में बहुमत मिला था और मुर्सी ने जिसपर दस्तखत कर कानून का रूप दिया था. नए संविधान से विवादास्पद इस्लामी धाराओं को निकाल दिया गया है और मुर्सी के खिलाफ जाने वाले पुलिस, सेना और न्यायपालिका जैसे संस्थानों को मजबूत बनाया गया है.

मिस्र के पश्चिमी साथियों को उम्मीद है कि इस संविधान के पास होने के बाद मिस्र में अरब वसंत के आने के तीन साल बाद प्रतिस्पर्धी राजनीतिक माहौल तैयार होगा. मिस्र का अरब दुनिया पर बहुत असर है और वहां जो कुछ होता है उसका दूसरे देशों पर भी प्रभाव पड़ेगा. आम तौर पर माना जा रहा है कि नए संविधान के मसौदे को लोगों का समर्थन मिलेगा लेकिन जनमत संग्रह के निष्पक्ष होने के बारे में संदेह व्यक्त किए जा रहे हैं.

जेनेवा स्थित न्यायविदों के अंतरारष्ट्रीय आयोग आईसीजे ने संविधान के मसौदे को दोषपूर्ण बताया है. कानून के शासन का समर्थन करने वाले संगठन ने निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जनमत संग्रह का प्रचार अभियान भय, धमकी और दमन के माहौल में हुआ है. सरकारी कार्रवाईयों और आतंकवादी घोषित किए जाने के कारण भूमिगत हुआ ब्रदरहुड मतदान का बहिष्कार कर रहा है. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने 'नहीं' का पोस्टर चिपकाने के कारण सात कार्यकर्ताओं पर मुकदमे की खबरों के बाद मांग की है कि लोगों को नए संविधान के खिलाफ वोट करने का अधिकार होना चाहिए.

एमजे/आईबी (रॉयटर्स)

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