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दुनिया

मिस्र की हिंसा में दर्जनों मरे

मिस्र में पिछले साल एक फुटबॉल मैच के हुई हिंसा के सिलसिले में 21 लोगों को मौत की सजा सुनाई है. सजा के फैसले के बाद हुई हिंसा में दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए हैं. उधर विपक्ष ने चुनावों का बहिष्कार करने की धमकी दी है.

पोर्ट सईद में पिछले साल फरवरी में स्टेडियम में हुई हिंसा के लिए खेल अधिकारियों और पुलिसकर्मियों सहित 73 लोगों पर पूर्वनियोजित हत्या और लापरवाही के आरोप लगाए गए थे. अल मसरी और अल अहली टीमों के समर्थकों के बीच प्रीमियर लीग के मैच के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. इसमें 74 लोग मारे गए. यह देश के फुटबॉल इतिहास में पिछले एक दशक में सबसे गंभीर हिंसाक घटना थी.

अदालत ने 21 लोगों को इस कांड में उनकी भूमिका के कारण मौत की सजा दी गई है. बाकी 52 लोगों पर फैसला 9 मार्च को सुनाया जाएगा. अधिकांश अभियुक्तों ने सुरक्षा कारणों से राजधानी काहिरा में हुई अदालती कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया. सभी अभियुक्तों को सजा के खिलाफ अपील करने का अधिकार है. शनिवार को जिन लोगों को सजा सुनाई गई है उनमें से कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है.

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अदालत के फैसले पर बंटे लोग

अदालत का फैसला आने के तुरंत बाद पोर्ट सईद में प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प शुरू हो गई. फुटबॉल क्लब अल मसरी के समर्थकों और अभियुक्तों के परिवार वालों का कहना है कि मुकदमा राजनीति प्रेरित है. गृह मंत्रालय ने कहा है कि शनिवार को हुई हिंसा में मारे गए लोगों में दो पुलिस जवान हैं. 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने जेल पर धावा बोलने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.

दूसरी ओर अल अहली टीम के समर्थकों ने फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने खुशी से पटाखे छोड़े और काहिरा में गीत गाते सड़कों पर निकल आए. स्टेडियम की हिंसा में मारे गए लोगों के परिजन फैसले के समय अदालत में मौजूद थे और उन्होंने अल्लाहो अकबर के नारे लगाए. फैसले से पहले अल अहली के समर्थकों ने कहा था कि यदि अभियुक्तों को मौत की सजा नहीं दी जाती है तो वे बदला लेंगे.

पिछले साल प्रीमियर लीग के मैच के बाद अल मसरी टीम के समर्थकों ने मैदान पर धावा बोल दिया और अल अहली के खिलाड़ियों और फैन पर हमला करने लगे. दर्शकों पर भी चाकूओं से हमला किया गया और स्टेडियम की छत से धक्का दे दिया गया. अल अहली अल्ट्राज ने पुलिस पर उनके विरोधियों के साथ साजिश करने का आरोप लगाया है.

शनिवार को हिंसक प्रदर्शनों के बाद पोर्ट सईद में सेना को तैनात कर दिया गया है. इससे पहले इस्माइलिया शहर में पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 9 लोग मारे गए थे. शुक्रवार को होसनी मुबारक को सत्ता से हटाने वाली मिस्र की क्रांति की दूसरी वर्षगांठ पर शुरू हुई हिंसा में इस्माइलिया की हिंसा सबसे खतरनाक थी.

मिस्र के सबसे बड़े विपक्षी मोर्चे ने आने वाले संसदीय चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी है. उन्होंने राजनीतिक मांगे न माने जाने की सूरत में अगले हफ्ते विशाल रैली निकालने की धमकी दी है. विपक्ष ने कहा है, "नेशनल सैलवेशन फ्रंट राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की अत्यधिक हिंसा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार मानता है और इसकी जांच व खूनखराबे के दोषियों को सजा देने के लिए स्वतंत्र समिति बनाने की मांग करता है."

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अरब वसंत के बाद की हिंसा

उन्होंने इस्लामी सरकार द्वारा बनाए गए संविधान के मसौदे को रद्द करने और राष्ट्रीय बचाव सरकार बनाने की मांग की. हाल ही एक जनमत संग्रह में मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी के मुर्सी की सरकार के मसौदे का अनुमोदन कर दिया गया था, लेकिन उसकी वजह से देश का ध्रुवीकरण हो गया है. धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी विपक्ष का कहना है कि इससे राजनीतिक और अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन होगा.

विपक्ष ने कहा है, "यदि हमारी मांगे आनेवाले दिनों में नहीं मानी जाती तो मोर्चा शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव जल्द कराने की मांग के साथ विशाल प्रदर्शन का आह्वान करेगा. मोर्चे की पार्टियां व्यापक समाधान के बिना संसदीय चुनावों में भी हिस्सा नहीं लेगी." संसदीय चुनावों की तारीख की घोषणा अभी तक नहीं की गई है. होसनी मुबारक के पतन के बाद चुनी गई पहली संसद को सर्वोच्च अदालत ने निरस्त कर दिया था. उसमें मुस्लिम ब्रदरहुड का बहुमत था.

मिस्र के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने इथियोपिया का दौरा रद्द कर दिया है जहां वे अफ्रीकी शिखर सम्मेलन में भाग लेने जाने वाले थे. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ देश में फैली अशांति पर आपात बैठक की है. इसमें रक्षा, कानून और सूचना मंत्री भी शामिल हैं. उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि अधिकारी कानून तोड़ने वाले लोगों को सजा देंगे.

एमजे/ओएसजे (डीपीए)

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