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दुनिया

मिस्र की अदालत में मुर्सी

चार महीने से अज्ञात स्थान पर रखे गए मिस्र के अपदस्थ इस्लामी राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अदालती कार्रवाई के लिए काहिरा लाया गया है. मुर्सी पर लग रहे आरोप साबित हुए तो उन्हें मौत की सजा भी हो सकती है.

इसी साल 3 जुलाई को मिस्र की सेना ने विरोध प्रदर्शनों के बाद मुर्सी को पद से हटा कर किसी अज्ञात जगह पर नजरबंद कर दिया. उसके बाद आज पहली बार वो सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं. समाचार एजेंसी मीना ने खबर दी है कि मुर्सी को सेना के किसी अज्ञात ठिकाने से हेलीकॉप्टर में बिठाकर पूर्वी काहिरा की एक पुलिस एकेडमी में लाया गया है. मुर्सी की सुनवाई यहीं चलेगी. मुर्सी के 14 सहयोगियों को भी काहिरा की जेलों से पुलिस की बख्तरबंद गाड़ियों में यहां लाया गया है. यह सभी मुस्लिम ब्रदरहुड के वरिष्ठ सदस्य हैं.

अदालती कार्रवाई बेहद जोखिम और तनाव भरे माहौल में हो रही है, क्योंकि देश इस समय अलग अलग गुटों में बंटा नजर आ रहा है. एक तरफ सेना है तो दूसरी तरफ मुर्सी के इस्लामी समर्थक, इसके बाद उदारवादी मुस्लिम हैं, ईसाइयों और महिलाओं के भी अलग अलग ध्रुव हैं. रविवार को आखिरी वक्त में अधिकारियों ने सुनवाई की जगह बदल दी.

मुस्लिम ब्रदरहुड की बड़ी रैलियां करने की योजना को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है. सुनवाई वाली जगह पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं. सैकड़ों की तादाद में काले कपड़े पहनी दंगा नियंत्रक पुलिस के साथ ही बख्तरबंद गाड़ियां भी तैनात की गई हैं. इमारत के बाहर सेना की बख्तरबंद गाड़ियों का भी जमावड़ा है. एकेडमी तक जाने वाली आखिरी सड़क को सील कर दिया गया है. केवल अधिकृत लोगों और पत्रकारों को ही यहां तक आने की इजाजत है. इसी एकेडमी में मिस्र के पू्र्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक की भी सुनवाई होती रही है. होस्नी मुबारक को 2011 में भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से हटाया गया. मुबारक पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की हत्या रोकने में नाकाम रहने के आरोप हैं.

जुलाई में हटाने के बाद सेना के किसी अज्ञात ठिकाने पर रह रहे मुर्सी का बाहरी दुनिया के साथ बहुत कम ही संपर्क बीते महीनों में रहा है. ऐसी उम्मीद है कि अदालती कार्रवाई में अपना पक्ष वो खुद ही रखेंगे. मुस्लिम ब्रदरहुड के वकीलों के कहना है कि मुबारक के बाद वो पहले राजनेता हैं, जो इस तरह के आरोपों का सामना करने जा रहे हैं. इस बात की बहुत संभावना है कि मुर्सी इस कार्रवाई का इस्तेमाल यह जताने में करेंगे कि वही मिस्र के वैध राष्ट्रपति हैं, इसके साथ ही वह अदालती कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाने के साथ ही 3 जुलाई के तख्तापलट पर भी अभियोग लगाएंगे और इन सब के जरिए सड़कों पर मौजूद अपने समर्थकों में उत्साह भरेंगे.

चार महीने की कैद के दौरान मुर्सी से लगातार पूछताछ की जाती रही है और उन्हें अपने वकीलों से भी नहीं मिलने दिया गया. उन्होंने कम से कम दो बार टेलीफोन पर अपने परिवार वालों से बात की है और दो विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की है. ब्रदरहुड के समर्थक मुर्सी की नजरबंदी को अपहरण कह रहे हैं. उधर मुर्सी ने पूछताछ कर रहे अधिकारियों के साथ सहयोग करने से मना कर दिया है. मुर्सी के साथ उनके 14 सहयोगियों को भी आरोपों का सामना करना है. इसमें मोहम्मद अल बेलती और एसाम एल अरियन भी हैं. इन लोगों पर पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति भवन के बाहर हुई झड़पों से जुड़े होने का आरोप है, इसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है.

मुबारक की तरह मुर्सी की सुनवाई का सीधा प्रसारण नहीं किया जा रहा है और पूर्व राष्ट्रपति को सुनवाई के बाद जेल की जगह फिर वहीं ले जाया जाएगा, जहां से उन्हें लाया गया.

एनआर/एएम (एपी, रॉयटर्स)

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