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दुनिया

मिंस्क बैठक से पहले यूक्रेन में हिंसा

बुधवार को यूक्रेन में होने वाली शांति बैठक से पहले देश में हिंसा के और मामले सामने आए हैं. मिंस्क में जर्मनी और फ्रांस की मध्यस्थता में हो रही शांति वार्ता के विफल होने के आशंका है.

जहां एक तरफ विश्व नेता यूक्रेन में शांति प्रक्रिया पर विचार विमर्श कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन का संकट और गहराता जा रहा है. पूर्वी यूक्रेन में चल रही हिंसा में बारह और लोग मारे गए हैं. इनमें से सात यूक्रेन सेना के हैं. यूक्रेन में गृह मंत्रालय के सलाहकार जोरियन श्किरयाक ने बताया कि सेना ने डोनेत्स्क से करीब 90 किलोमीटर दूर तीन गांवों पर कब्जा कर लिया है और दो अन्य गांवों पर कब्जे की कार्रवाई जारी है.

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संकट में जर्मनी और फ्रांस मध्यस्थता कर रहे हैं. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कल अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा से भेंट की और यूक्रेन संकट पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति को ले कर भी चर्चा हुई. जहां मैर्केल पहले ही साफ कर चुकी हैं कि जर्मनी यूक्रेन को हथियार नहीं देगा, वहीं अमेरिका यूक्रेन को हथियार की आपूर्ति करने पर विचार कर रहा है. ओबामा फिलहाल शांति प्रक्रिया के दौरान हथियारों की आपूर्ति रोकने पर राजी हो गए हैं.

यूक्रेन को हथियार देने की वकालत करने वालों की दलील है कि अलगाववादियों का सामना करने के लिए यूक्रेन को इन हथियारों की जरूरत है. वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जान का और नुकसान ना हो, इसके लिए हथियारों का ना दिया जाना जरूरी है. दूसरी ओर रूस भी अब तक इस बात से इंकार करता आया है कि वह अलगाववादियों को हथियार मुहैया करा रहा है. अमेरिका के दौरे पर जाने से पहले मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी बैठक की और यूक्रेन संकट पर चर्चा की.

बुधवार को विवाद के हल के लिए यूक्रेन, रूस, फ्रांस और जर्मनी के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं. लेकिन अमेरिका में मैर्केल इस समझौते को ले कर सकारात्मक नहीं दिखीं. उन्होंने कहा कि वे इस बात की कोई कोई गारंटी नहीं दे सकतीं कि पुतिन समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. मैर्केल ने कहा, "मैं आपको बुधवार को होने वाली बैठक की भी कोई गारंटी नहीं दे सकती. हो सकता है कि उसका कोई नतीजा ना निकले." वहीं पुतिन ने कहा है कि मिंस्क में नेताओं की बैठक से पहले कई बिंदुओं पर सहमति बनना जरूरी है.

वार्ता कितनी मुश्किल है, यह इस बात से पता चलता है कि फ्रांस के एक राजनयिक ने इसे पेचीदा बताया है. उन्होंने कहा, "आठ दिन पहले वे (यूक्रेन और रूस) एक दूसरे से बात भी नहीं कर रहे थे. अब वे एक ही मेज पर साथ आ चुके हैं." लेकिन उन्हें एकमत करना "बेहद पेचीदा" काम है. पिछले साल अप्रैल से अब तक यूक्रेन संकट में 5400 लोगों की जानें गई हैं.

आईबी/एमजे (एएफपी)

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