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विज्ञान

माहौल में कैसे फैलती हैं जहरीली गैसें

भोपाल गैस कांड यह बताने के लिए काफी है कि कोई जहरीली गैस कितनी विनाशकारी हो सकती है. ऐसे हादसे होने पर कैसे ये गैसें पर्यावरण में फैलती हैं और उनसे कैसा निपटा जाए, इस पर अब जर्मनी में खास अध्ययन हो रहा है.

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भोपाल अब तक झेल रहा है गैस त्रासदी की मार

हर रोज सड़कों पर, रेल की पटरियों पर या जहाजों से जहरीले पदार्थों का परिवहन होता है. अगर कोई दुर्घटना हो जाए और जहरीली गैस फैलने लगे तो खासकर शहरों में उसके भयानक नतीजे हो सकते हैं. भोपाल गैस त्रासदी और उससे जुड़े हुए स्कैंडल की याद अभी ताजी ही है. कैसे ऐसी स्थिति से निपटा जाए, इसे जानने के लिए हैम्बर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अनोखा प्रयोग किया है. उन्होंने देखने की कोशिश की

Explosion in Belgien

कि हैम्बर्ग शहर में कोई गैस कैसे फैल सकती है और कैसे उस पर काबू पाया जा सकता है. गैस का यह क्षेत्र या धुंए का गुब्बारा 26 मीटर लंबा, चार मीटर चौड़ा और तीन मीटर ऊंचा था. हैम्बर्ग के सिटी सेंटर के इस मॉडल को साढ़े तीन सौवें हिस्से का बनाया गया, जिसमें सारे भवन सही अनुपात में बनाए गए.

मौसम विज्ञान के प्रोफेसर बैर्न्ड लाइट्ल बताते हैं, "अगर कुहासा छा जाता है, तो डरने की कोई बात नहीं है. यह नाटक के मंच पर इस्तेमाल किया जाने वाला कुहासा है, कोई नुकसान नहीं होता है. इसे हम एक पाइप के जरिए माडल में छोड़ रहे हैं. बंदरगाह में एक गोदाम में हमने यह पाइप डाला है, वहां से धुंआ अब फैलने लगता है."

वैज्ञानिक को यहां आगजनी करने वाले की भूमिका लेनी पड़ रही है. गोदाम में आग दिख रही है, वहां से धुंआ निकल रहा है, जहरीली गैस ऐसे ही फैलती है. लेकिन प्रोफेसर लाइट्ल के लिए यह काफी नहीं है. वह कहते हैं, "अभी बात नहीं बनी है, क्योंकि हवा नहीं चल रही है."

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