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दुनिया

माली में सैन्य अभियान शुरू

अफ्रीकी देश माली में कट्टरपंथी आतंकवादियों के लिए जोरदार सैन्य अभियान शुरू हुआ. फ्रांस के लड़ाकू विमानों की मदद से माली की सेना ने आतंकवादियों को खदेड़ना शुरू कर दिया है. कई हिस्से एक साल से आतंकवादियों के कब्जे में हैं.

फ्रांस के एक रेडियो के मुताबिक फ्रांसीसी वायुसेना की बमबारी की मदद से माली की सेना आगे बढ़ी है. शुक्रवार देर रात तक सेना ने देश के उत्तर में कुछ इलाकों से आतंकवादियों को खदेड़ दिया. उत्तरी माली का ज्यादातर हिस्सा साल भर से आतंकवादियों के कब्जे में है. माली और फ्रांस का कहना है कि कट्टरपंथी अल कायदा के आतंकवादी हैं. वे माली को सुरक्षित अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

शुक्रवार को फ्रांसीसी माली में सैन्य दखल देने का औपचारिक एलान करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रोंसुआ ओलांद ने कहा, 'आतंकवादियों' ने 'माली के अस्तित्व' और स्थानीय शांति व सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. फ्रांसीसी संसद के विदेश मामलों के आयोग की अध्यक्ष एलिजाबेथ गिगो ने माली में फ्रांस के सैनिकों की तैनाती की जानकारी दी. गिगो के मुताबिक सेना फ्रांसीसी नागरिकों की रक्षा करेगी.

माली में फ्रांस के करीब 6,000 नागरिक हैं. फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने सभी नागरिकों को तुरंत माली छोड़ने की सलाह दी है. नागरिकों का एक बड़ा जत्था शनिवार को फ्रांस पहुंचा है. इस बीच उत्तरी माली में हथियारबंद गुटों ने फ्रांस के सात नागरिकों को बंधक बना लिया है.

बड़े सैन्य अभियान की तैयारी

माली में शुक्रवार रात इमरजेंसी की घोषणा की गई. माली के राष्ट्रपति डियोनकोउंडा ट्राओरे ने देशवासियों के एकजुट होकर आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने की अपील भी की है. सोमवार को माली में बड़े पैमाने पर पश्चिमी अफ्रीकी देशों की सेनाएं भी पहुंच जाएंगी. पश्चिमी अफ्रीकी देशों के संगठन इकोवास के अधिकारियों ने शनिवार को यह एलान किया. इकोवास के नेता अली काउलीबाली ने कहा, "सेना की तैनाती के फैसले पर कल अध्यक्ष ने दस्तखत कर दिए हैं. सोमवार तक सेनाएं वहां होंगी या वहां पहुंचने लगेंगी." इस वक्त आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति अलसाने क्वातारा इकोवास के अध्यक्ष हैं.

साल भर से कट्टरपंथियों के हमले झेल रहे माली में दखल देने वाला फ्रांस पहला पश्चिमी देश है. माली फ्रांस का उपनिवेश रह चुका है. राष्ट्रपति ओलांद के मुताबिक उनकी सैन्य कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत आती है. संयुक्त राष्ट्र माली में अफ्रीकी सेनाएं भेजने की अनुमति दे चुका है. इस बीच अमेरिका भी माली की सेना को खुफिया और साजो सामान संबंधी सहायता देने पर विचार कर रहा है.

कैसे हुई शुरुआत

माली में साल भर पहले टुआरेग समुदाय और कट्टरपंथी विद्रोहियों ने जोरदार संघर्ष शुरू किया. हिंसक गुटों ने तख्तापलट का फायदा उठाया और ऐतिहासिक शहर टिम्बक्टू पर कब्जा कर लिया. दो और शहरों को विद्रोहियों ने अपने कब्जे में कर लिया, इसके बाद टुआरेग विद्रोही अलग थलग पड़ गए और सशस्त्र विद्रोह पूरी तरह अल कायदा से जुड़े संगठनों के नियंत्रण में आ गया. कट्टरपंथियों ने टिम्बक्टू की ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ डाला. उन्हें इस्लाम के विरुद्ध बताया गया. कट्टरपंथियों ने अपने नियंत्रण वाले इलाके में शरिया कानून लागू कर दिया. पत्थर मारने और अंग अलग करने की सजा भी लागू कर दी.

माली की सीमा बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर, अल्जीरिया, मॉरीटेनिया और गिनी से सटी हैं. देश की 90 फीसदी आबादी मुस्लिम है. पांच फीसदी ईसाई और पांच फीसदी स्थानीय जातियां हैं. 

ओएसजे/आईबी (डीपीए, एएफपी)

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