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दुनिया

मानवाधिकार संधि पर सहमति और चिंता

दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के नेताओं ने विवादास्पद मानवाधिकार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, इसमें बार बार हो रहे सीमा उल्लंघन और म्यांमार में होने वाली हिंसा पर फोकस रखा गया है.

आसियान देशों के 10 सदस्यों ने मानवाधिकार संधि को एक मील का पत्थर बताया है जो इलाके के 60 करोड़ लोगों की सुरक्षा में मदद करेगी. फिलीपीन्स के विदेश मंत्री अल्बेर्ट डेल रोसारियो ने कहा, "यह हमारे बच्चों के लिए विरासत है."

लेकिन आलोचकों का कहना है कि आसियान के लिए इसमें काफी कमियां हैं क्योंकि आसियान बहुत अलग अलग तरह की राजनीतिक तरीकों वाला इलाका है. एक ओर लाओस, वियतनाम में निरंकुश सत्ता है तो फिलीपीन्स में स्वतंत्र लोकतंत्र.

जिस दिन समझौते पर हस्ताक्षर हुए, उस दिन आसियान देशों के नेताओं को म्यांमार में जातीय हिंसा पर चर्चा करनी थी. जून से म्यांमार राखिने राज्य में मुसलमानों और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के बीच हिंसा में 180 लोग मारे गए.

आसियान के महासचिव सुरीन पित्सुवान ने एएफपी को बताया कि हिंसा के कारण इलाके में अस्थिरता पैदा हो सकती है. उन्होंने कहा कि आसियान देश इस हिंसा के बारे में बहस करेंगे और सम्मेलन खत्म होने के समय इस पर बयान देंगे.

आसियान के बाद दो दिवसीय ईस्ट एशिया समिट सोमवार को शुरू होगी. इसमें अमेरिका, चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और रूस के नेता भाग लेंगे. फिलहाल थाइलैंड की यात्रा कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा म्यांमार होते हुए सोमवार को नोम पेन्ह पहुंचेंगे.

म्यांमार में पहली बार सत्ताधारी राष्ट्रपति म्यांमार की यात्रा कर रहे हैं. वह म्यांमार में राजनीतिक सुधारों की सराहना करते हैं. रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले हमलों को जनसंहार बताने वाले इस्लामिक कोऑपरेशन संगठन ने ओबामा से अपील की है कि वह म्यांमार की सरकार पर ये हिंसा रोकने के लिए दबाव डालें.

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ओबामा के सहयोगियों ने संकेत दिया है कि वह एशिया दौरे पर मानवाधिकारों का मुद्दा उठाएंगे. ओबामा कंबोडियाई प्रधानमंत्री हून सेन से सरकार के मानवाधिकार रिकॉर्ड और राजनीतिक सुधार की जरूरत के बारे में बात करेंगे. इसके अलावा दक्षिणी चीन सागर पर भी बहस होगी.

हाल ही में चीन और जापान के बीच इस पानी पर काफी विवाद हुआ था. फिलीपीन्स और वियतनाम ने भी शिकायत की थी कि चीन सागर पर अधिकार के लिए आक्रामक हो रहा है. इसमें वह कूटनीतिक दबाव का भी इस्तेमाल कर रहा है.

भारत और आसियान देशों के बीच लंबे समय से नौकरियों और निवेश में मुक्त व्यापार समझौते की बात अंतिम चरण में है और इन्हें अगले महीने समाप्त करने की कोशिश की जाएगी.

भारत के वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने नोम पेन्ह जाते समय कहा कि इस समझौते से दो तरफा व्यापार और निवेश में बढ़ोत्तरी होगी, "सेवा क्षेत्र और निवेश में एफटीए पर बातचीत अंतिम चरण में है. कल और आज मध्यस्थों ने बातचीत की थी. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही फैसले पर पहुंचेंगे. भारत की कोशिश है कि यह समझौता दिल्ली में अगले महीने होने वाले सम्मेलन से पहले हो जाए."

2009 में ही भारत और आसियान के बीच सामान से जुड़ा एफटीए समझौता हो गया था लेकिन सेवा और निवेश क्षेत्र में संधि में वक्त लग रहा है क्योंकि दोनों पक्षों में अंतर काफी बड़ा है.

एएम/एजेए (एएफपी, पीटीआई)

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