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विज्ञान

माइक्रोसॉफ्ट एक्सपी शट डाउन

तेरह साल की जबरदस्त कामयाबी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट मंगलवार को एक्सपी ऑपरेटिंग सिस्टम बंद कर रही है. अंदेशा है कि इसके बाद एक्सपी वाले कंप्यूटरों में वायरस का हमला हो सकता है.

माइक्रोसॉफ्ट ने साफ कर दिया है कि अब वह इस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सिक्योरिटी अपडेट नहीं देगी. इसका मतलब दुनिया भर में एक्सपी पर चल रहे लाखों कंप्यूटर अचानक मुश्किल में पड़ सकते हैं. ये ऑनलाइन हैकरों और वायरसों के चक्कर में फंस सकते हैं. हालांकि एक्सपी ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटरों के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

वाई2के जैसा खतरा

कुछ जानकारों ने इसकी तुलना 1999 के वाई2के बग से की है, जब दुनिया एक नई सहस्राब्दी में जा रही थी और कंप्यूटर के कई जानकारों का कहना था कि कंप्यूटर में 21वीं सदी के लिए पर्याप्त प्रोग्राम नहीं हैं और वे ध्वस्त हो सकते हैं. हालांकि उसका कोई खास असर नहीं हुआ.

लंबे वक्त तक नीले आकाश के नीचे हरी भरी धरती वाली कंप्यूटर स्क्रीन यूजरों के लिए संतुष्टि और इत्मिनान का पर्याय रही. लेकिन अब इसे देख कर उन्हें चिंता हो सकती है. माइक्रोसॉफ्ट ने चेतावनी दी है कि जो यूजर अपडेट नहीं करेंगे, उनके कंप्यूटरों पर फौरन हैकरों का हमला हो सकता है. कंपनी ने 2008 से ही इसकी बिक्री घटानी शुरू कर दी थी. हालांकि 2011 तक कुछ सस्ते लैपटॉपों में यह इनबिल्ट आता था.

माइक्रोसॉफ्ट ने इस बीच विंडोज विस्टा, विंडोज 8 और दूसरे कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार में उतारे लेकिन वे एक्सपी की कामयाबी को टक्कर नहीं दे सके. ज्यादातर यूजर पुराने भरोसेमंद एक्सपी के साथ ही चिपके रहे. सॉफ्टवेयर ट्रैकिंग कंपनी नेटमार्केटशेयर डॉट कॉम के मुताबिक दुनिया भर के 28 फीसदी यूजर अब भी एक्सपी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.

कारोबार पर असर

खास तौर पर कारोबार जगत पर इसका खास असर पड़ सकता है. अनुमान है कि दुनिया भर के करीब 40 फीसदी कारोबार में माइक्रोसॉफ्ट एक्सपी का इस्तेमाल होता है. वे इस सिस्टम को इस तरह अपना चुके हैं कि बदलना नहीं चाहते. इसके अलावा पैसे निकालने वाली एटीएम मशीनों पर भी भारी असर पड़ सकता है. एटीम सप्लायर एनसीआर के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी, 2014 तक दुनिया भर में 95 फीसदी एटीएम माइक्रोसॉफ्ट एक्सपी पर चलते हैं.

माइक्रोसॉफ्ट के ट्रस्टवर्दी कंप्यूटिंग के निदेशक टिम रैन्स का कहना है कि मामला और खतरनाक हो सकता है क्योंकि कंपनी एक्सपी के अलावा दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टमों के लिए अपडेट जारी करती रहेगी. हैकर इन अपडेटों की रिवर्स इंजीनियरिंग करके एक्सपी की कमजोर कड़ियों का पता लगा सकते हैं, "अगर यह काम कर जाता है, तो हैकर एक्सपी में सेंध लगा सकते हैं." कुछ कंपनियों और सरकारों ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक्सपी को आगे बढ़ाने के लिए भारी भरकम समझौते किए हैं. ब्रिटेन सरकार ने 55 लाख पाउंड अदा किया है ताकि एक्सपी के कामकाज को एक साल के लिए बढ़ाया जा सके.

कैसे करें बचाव

दूसरे लोग थर्ड पार्टी का सहारा ले रहे हैं लेकिन उनकी प्रमाणिकता की कोई गारंटी नहीं है. लेकिन कुछ जानकार इसे फिजूल की चिंता बता रहे हैं. उनका कहना है कि एक्सपी इस्तेमाल करने वाले टेक सैवी लोग हैं और उन्हें पता है कि किस तरह का फायरवॉल और वायरस चेक लगा कर कंप्यूटर की सुरक्षा की जा सकती है. कंप्यूटरवर्ल्ड डॉट कॉम पर प्रेटसन ग्राला ने लिखा है, "कुछ लोग 12 साल से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और अभी भी वे इसे नहीं बदल रहे हैं."

हालांकि खुद माइक्रोसॉफ्ट इस राय से सहमत नहीं. कंपनी के संचार निदेशक टॉम मर्फी का कहना है, "आगे बढ़ने का वक्त आ गया है. एक्सपी किसी और जमाने के लिए बनाया गया था."

एजेए/ओएसजे (डीपीए)

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