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दुनिया

महिला खतना के दावे पर सवाल

संयुक्त राष्ट्र के उस दावे पर सवाल उठने लगे हैं कि इराक के आईसिस जिहादियों ने महिलाओं के खतने का आदेश दिया है. गुरुवार को यूएन ने कहा था कि आइसिस ने 11 से 46 साल की सभी महिलाओं के खतने का फरमान सुनाया है.

इराक में संयुक्त राष्ट्र की सबसे वरिष्ठ अधिकारी, जैकलीन बैडकॉक ने पत्रकारों से कहा, "आईसिस ने इस फतवे को जारी किया है. हमें इसके बारे में.. पता चला है. हमारे पास कोई आंकड़े नहीं हैं."

फर्जी हो सकता है दावा

इस्लामिक स्टेट या आइसिस के नाम का मतलब है इराक और सीरिया में इस्लामी राज्य. पिछले महीने इस संगठन ने इराक के बड़े हिस्सों पर कब्जा जमा लिया और सलाफी यानी कट्टरपंथी इस्लामी कानून को लागू करने लगा. हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि फतवा फर्जी भी हो सकता है. ट्विटर पर पत्रकारों ने लिखा कि इराक में उनके जानकारों को इसके बारे में कोई खबर नहीं मिली.

इराक और सीरिया में कट्टरपंथी गुटों पर काम कर रहे चार्ल्स लिस्टर बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र का दावा फर्जी संदेश पर आधारित हो सकता है. "महिला खतना इस्लामिक स्टेट के दावे से मेल नहीं खाता. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कितने बर्बर हैं."

महिला खतना को लेकर विवाद

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि इराक में इसकी जांच हो रही है और अब तक महिला खतना को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है. वरिष्ठ अधिकारी बैडकॉक ने कहा था कि अगर संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों को देखा जाए तो उनके प्रभाव क्षेत्र में रहने वाली 40 लाख लड़कियों और महिलाओं पर असर पड़ सकता है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि महिला खतना इराक में प्रचलित नहीं है और केवल कुछ ही इलाकों में इसकी प्रथा है. इराक के उत्तरी कुर्द इलाकों में महिला खतना की परंपरा है लेकिन इन इलाकों तक इस्लामी कट्टरपंथी नहीं पहुंच पाए हैं. आइसिस के बारे में यह खबर एक ऑनलाइन दस्तावेज पर आधारित है लेकिन इसमें कई सवाल हैं और हो सकता है कि यह फर्जी हो.

कुछ सालों से अफ्रीका और यहां तक की भारत के पश्चिमी इलाकों में महिला खतना को लेकर काफी विवाद चल रहा है और दुनिया भर के स्वास्थ्य संगठन इस पर लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके तहत महिलाओं के जननांगों का ऑपरेशन करके उसे विकृत कर दिया जाता है.

महिला खतना के स्वास्थ्य पर बुरे असर के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते. असुरक्षित औजारों से ऑपरेशन की वजह से इससे इन्फेकशन और महिला के बच्चे पैदा करने की क्षमता पर बेहद खराब असर पड़ सकता है. इससे कई महिलाएं जिंदगी भर के लिए सेक्स में असमर्थ हो जाती हैं. इस वजह से आइसिस और महिला खतना की खबर ने दुनिया में सनसनी फैला दी है. लंदन में हाल ही में इसे रोकने को लेकर एक बैठक भी हुई है.

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार

पिछले हफ्तों में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने उत्तरी इराक के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया है. इनमें राजधानी बगदाद के करीब 150 किलोमीटर दूर मोसुल शहर में भी आइसिस के बंदूकधारी हावी हो गए हैं. यह शहर इराक में ईसाइयों के लिए भी बहुत पवित्र माना जाता है और यहां चौथी सदी में बना एक गिरजाघर भी है.

इस्लामी लड़ाकों ने कब्जे के बाद मोसुल में रह रहे ईसाइयों से कहा है कि वह या तो इस्लाम कबूल करें या जजिया यानी धार्मिक कर अदा करें. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक कुछ ईसाइयों ने धर्म परिवर्तन कर लिया है और वे मुस्लिम हो गए हैं. मोसुल से कई हजार परिवार भाग रहे हैं.

एमजी/एजेए (एएफपी, डीपीए)

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