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दुनिया

महिला आरक्षण पर राजनीतिक संकट

जर्मन उद्यमों में महिला मैनेजरों की भारी कमी है. सरकार उनके लिए आरक्षण कोटे की मांग मानने को तैयार नहीं. वहीं संसद में विपक्ष के गैरसरकारी बिल को सत्ताधारी सांसदों के एक धड़े ने समर्थन देने की बात कही. सरकार पर दबाव.

उद्यमों की निगरानी बोर्ड में महिलाओं के लिए आरक्षण सरकारी मोर्चे के लिए लिटमस टेस्ट बन गया है. इस बिल को संसद के ऊपरी सदन बुंडेसराट ने पास कर दिया है, जहां विपक्षी पार्टियों का बहुमत है. उनके अलावा सत्ताधारी सीडीयू शासित दो प्रांतीय सरकारों ने भी बुंडेसराट में बिल का समर्थन किया है. अब सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करने वाले सत्ताधारी सीडीयू और सीएसयू के सांसदों से बिल का समर्थन करने की अपील कर रही है. चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी के संसदीय मैनेजर चौंक गए हैं.

अर्थव्यवस्था में महिला आरक्षण पर वर्षों से चल रही बहस के बाद इस गुरुवार को कोई फैसला हो सकता है. संसद के निचले सदन बुंडेसटाग में गुरुवार को हैम्बर्ग के प्रस्ताव पर मतदान होगा. चांसलर मैर्केल के सत्ताधारी मोर्चे की छोटी पार्टी एफडीपी इसके खिलाफ है लेकिन चांसलर की अपनी पार्टी में ऐसे सांसद हैं जो आरक्षण का समर्थन करते हैं. इसकी वजह से गुरुवार को सत्ताधारी मोर्चे की एकता और शासन क्षमता की परीक्षा है. विपक्ष को बिल पास कराने के लिए सत्ता पक्ष के 21 सांसदों के समर्थन की जरूरत है.

Bundestagsdebatte Gleichstellungspolitik Frauenquote Die Linke

महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग

बुंडेसराट में पारित बिल के अनुसार 2018 तक उद्यमों की निगरानी और प्रशासनिक परिषद कम से कम 20 फीसदी सीटें महिलाओं से भरनी होगी. 2023 तक महिलाओं की संख्या 40 फीसदी करनी होगी. चांसलर मैर्केल की सरकार में श्रम मंत्री ऊर्सुला फॉन डेअ लाएन निगरानी और कार्यकारी बोर्ड में महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण की मांग करती रही हैं, लेकिन परिवार कल्याण मंत्री क्रिस्टीना श्रोएडर इसके खिलाफ है और वे उद्यमों के ऐच्छिक विकल्प का समर्थन करती हैं. जर्मनी पर यूरोपीय संघ का भी दबाव है. ईयू 2020 तक शेयर बाजारों में दर्ज 5000 कंपनियों में महिलाओं के लिए 40 फीसदी का आरक्षण चाहता है.   

संसद में होने वाले मतदान से पहले एसपीडी के संसदीय दल के नेता फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर ने सत्ताधारी सांसदों से आरक्षण के पक्ष में मत देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि बहुत से सांसद विपक्ष के साथ वोट करना चाहते हैं. "अब सब कुछ उनकी हिम्मत पर निर्भर करेगा." सीडीयू के प्रमुख नेताओं ने फिर से महिलाओं के लिए तय आरक्षण का विरोध किया है, लेकिन वे अपने सांसदों के विपक्ष के साथ जाने की संभावना से घबराए हुए हैं.

सीडीयू पार्टी के ईयू कमिश्नर गुंटर ओएटिंगर ने आरक्षण को गैरजरूरी बताते हुए कहा है कि अधिकांश महिलाएं यूं भी निगरानी बोर्ड में नहीं जाती, वे तो सीईओ बनना चाहती हैं या ऑपरेटिव डिपार्टमेंट की मुखिया बनना चाहती हैं. सीडीयू की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यूलिया क्लॉएकनर ने कहा कि उद्यमों को खुद अपना कोटा तय करना चाहिए और महिलाओं को उच्च पदों पर नियुक्त करना चाहिए. सीडीयू-सीएसयू संसदीय दल का नेतृत्व इस बीच उन सांसदों से बातचीत कर रहा है, जिन्हें आरक्षण पर पार्टी की लाइन से परेशानी है.

महिला आरक्षण के कारण सत्ताधारी मोर्चे में आए संकट को टालने के लिए पार्टी नेतृत्व इस साल के अपने चुनाव कार्यक्रम में आरक्षण के मुद्दे को शामिल करना चाहता है. पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनाव कार्यक्रम में महिलाओं के लिए 2020 तक 30 प्रतिशत के आरक्षण की मांग शामिल की जाएगी.

एमजे/एनआर (डीपीए, रॉयटर्स)

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