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दुनिया

महिलाओं के कारण संभव हुआ मार्स मिशन

भारत ने सफलतापूर्वक मंगलयान भेज कर पूरी दुनिया के सामने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है. इसरो ने कहा है कि मार्स मिशन के केंद्र में महिलाएं रही हैं.

भारत के मार्स मिशन को दर्शाते हुए 'रीचिंग फॉर द स्टार्स' नाम की किताब लॉन्च की गई है. नई दिल्ली में किताब के लॉन्च पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की पूरी 'ड्रीम टीम' मौजूद थी. इसी मौके पर इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि मंगल मिशन के केंद्र में महिलाएं रही हैं. उन्होंने कहा, "हमारी टीम में बीस फीसदी महिलाएं हैं. कुछ प्रयोगशालाओं की प्रमुख हैं, कुछ विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर जैसे प्रमुख केंद्रों की उपनिदेशक हैं. अगर आप हमारे मिशन के कंट्रोल सेंटरों में जा कर देखेंगे तो आपको वहां दिन रात महिलाएं काम करती नजर आएंगी."

इसरो में महिलाओं की भूमिका पर मंगलयान के लॉन्च से ही चर्चा चल रही है. 24 सितंबर को जब मंगलयान मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया तो इसरो के सेंटर में कई महिलाओं को अपनी खुशी जाहिर करते और एक दूसरे के गले लगते देखा गया. साड़ी पहने, बिंदी और गजरा लगाए इन अधेड़ उम्र की महिलाओं ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. जहां अधिकतर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन की तस्वीरों में बहुतायत में पुरुष ही देखने को मिलते हैं, वहीं यहां एक अलग ही छवि दिखाई दी.

जल्द ही नया मिशन

भारत पहला देश है जिसे पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में सैटेलाइट पहुंचाने में सफलता मिली. मार्स ऑर्बिटर मिशन के प्रमुख एस अरुणन ने इस मौके पर कहा कि उनकी टीम ने दूसरे देशों की गलतियों पर ध्यान दिया, "करीब दो तीन महीने तो हम दूसरे देशों की गलतियों का ही अध्ययन करते रहे. इसलिए हम पहले ही दूसरों की गलतियों से सीख ले चुके थे."

के राधाकृष्णन ने कहा कि मंगल पर अगला मिशन 2018 से 2020 के बीच लॉन्च किया जा सकता है. उन्होंने नए मिशन पर ज्यादा जानकारी तो नहीं दी लेकिन इतना जरूर कहा कि अगला मिशन मौजूदा ऑर्बिटर मिशन से अलग होगा और चंद्रयान 2 पर भी केंद्रित होगा. उन्होंने कहा, "मार्स ऑर्बिटर मिशन एक अंत नहीं, शुरुआत है."

नई दिल्ली में लॉन्च की गयी किताब 'रीचिंग फॉर द स्टार्स: इंडियाज जर्नी टू मार्स एंड बियॉन्ड' पल्लव बगला और सुभद्र मेनन ने लिखी है और इसमें मार्स मिशन की टीम के अनुभव शामिल किए गए हैं.

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