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दुनिया

महाराष्ट्र में भाजपा सरकार को विश्वासमत

महाराष्ट्र विधानसभा में आज भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अल्पमत सरकार ने ध्वनिमत से विश्वासमत हासिल कर लिया. शिवसेना और कांग्रेस ने इसका विरोध किया है.

विधानसभा में सबसे पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता हरीभाऊ बागड़े को सर्वसम्मति से महाराष्ट्र विधानसभा का स्पीकर चुना गया. उसके बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार की ओर पेश किया गया विश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित घोषित किया गया. शिवसेना ने सरकार का विरोध करने की घोषणा की थी. अध्यक्ष द्वारा विश्वासमत पर मत विभाजन की मांग ठुकरा दिए जाने के कारण शिवसेना के सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष के आसन के निकट हंगामा किया.

विवादित विश्वासमत

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने विश्वासमत हासिल करने की प्रक्रिया को गैर कानूनी करार दिया और ध्वनिमत से विश्वासमत हासिल करने की प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वासमत हासिल करने की परंपरा को तोड़ते हुए ध्वनिमत से सरकार के पक्ष में बहुमत सिद्ध कर दिया. शिवसेना ने भी इसे अलोकतांत्रिक बताया.

इसके विरोध में शिव सेना और कांग्रेस के विधायकों ने सदन में अभिभाषण करने जा रहे राज्यपाल की कार का घेराव किया. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने राज्यपाल विद्यासागर राव को पत्र लिख कर आग्रह किया था कि वह सदन में अभिभाषण नहीं करें. हालांकि थोड़ी देर बाद राज्यपाल सदन में भाषण देने के लिए चले गए. सदन में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा कुछ अन्य सदस्य उपस्थित थे जबकि सदन के बाहर कांग्रेस और शिव सेना के विधायक नारेबाजी कर रहे थे.

अध्यक्ष का बचाव

उधर विधानसभा अध्यक्ष हरीभाऊ बागड़े ने कहा है कि भाजपा ने सदन में अपना बहुमत नियम के अनुसार सिद्ध किया है. बागड़े ने पत्रकारों से कहा "सबसे पहले हमने सरकार को बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा और उसके बाद विपक्ष का नेता चुनने के लिए कहा क्योंकि जब तक सरकार नहीं बनती तब तक विपक्ष का नेता कैसे चुनेंगे."

बागड़े ने कहा कि जब विश्वास प्रस्ताव रखा जाता है तब अनुकूल और प्रतिकूल में ध्वनि की बात कही जाती है. यदि इस समय किसी भी पार्टी के लोग मतदान की मांग करते हैं तब अध्यक्ष को बहुमत सिद्ध करने के लिए मतदान कराना पड़ता है. उन्होंने कहा कि जब किसी ने मतदान की मांग नहीं की तब ध्वनिमत से सरकार का बहुमत मान लिया गया, "विपक्ष के नेता पद का चुनाव के समय कुछ लोगों ने मतदान की मांग की लेकिन यह काफी देरी से की गयी थी, इसलिए उनकी मांग को नहीं माना गया."

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