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जर्मन चुनाव

महाबचत का जर्मन कार्यक्रम

जर्मनी के इतिहास में राजकीय खर्चों में कटौती का अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है. सरकार का इरादा है कि सन 2016 तक लगभग 80 अरब यूरो का बचत किया जाए.

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गंभीर दौर, मुश्किल दौर

सन 2014 तक लगभग अस्सी अरब यूरो बचत की योजना - यह अब तक के अनुमानों से कहीं अधिक है. ख़ासकर सामाजिक क्षेत्र में कटौती के ज़रिये यह बचत की जाएगी. लेकिन उद्यमों पर अरबों का नया बोझ पड़ेगा. इन प्रस्तावों पर प्रकाश डालते हुए चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा कि यह एक गंभीर दौर है, मुश्किल दौर है

मैं आपसे कह सकती हूं कि पिछले घंटे वाकई अनोखे मुश्किल घंटे थे. सन 2014 तक लगभग अस्सी अरब यूरो की बचत करनी पड़ेगी, ताकि हमारी आर्थिक ताकत का फिर से ठोस आधार हो. स्थिति की गंभीरता हमारी आंखों के सामने है, और मैं समझती हूं कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थनीति होने के नाते जर्मनी को एक मिसाल पेश करनी है, और साथ ही संविधान के प्रत्यादेश के अनुसार हम इसके लिए बाध्य भी हैं, क्योंकि उसमें राजकीय कर्ज़ की सीमा तय की गई है. - अंगेला मैर्केल

बच्चों के लिए धनराशि में कटौती की गई है, सामाजिक खैराती पाने वालों के लिए उसे पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया है. इसके अलावा सरकारी दफ़्तरों में 10 हज़ार कार्यस्थान घटाए जाएंगे. सन 2011 में राजपत्रित कर्मचारियों को बोनस के रूप में मिलने वाली धनराशि नहीं मिलेगी, जिसका मतलब उनकी वार्षिक आमदनी में ढाई फ़ीसदी की कमी है.

रक्षा के क्षेत्र में भी बचत की कोशिश की जा रही है. रक्षा मंत्री कार्ल थेओडोर त्सू गुटेनबैर्ग सितंबर तक एक योजना पेश करने वाले हैं, जिसका लक्ष्य है जर्मन सेना बुंडेसवेयर की ताकत ढाई लाख सैनिकों से घटाकर दो लाख 10 हज़ार तक उतारना. इसके लिए सेना की संरचना में आमूल सुधार किए जाएंगे.

कैबिनेट की बैठक में समय से परे तक चलने वाले परमाणु रिएक्टरों के लिए नए कर की व्यवस्था की गई है. इससे प्राप्त होने वाली अतिरिक्त आमदनी हर साल 2.3 अरब यूरो के बराबर होगी. जर्मन हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाले यात्रियों को अतिरिक्त कर देने पड़ेंगे. इसके अलावा बैंकों की आर्थिक गतिविधियों पर भी सन 2012 तक नए कर लगाए जाएंगे. जर्मन सरकार की कोशिश होगी कि उससे पहले यूरोप और विश्व के स्तर पर एक समाधान प्राप्त किया जाए.

विपक्षी दलों ने सरकार की योजनाओं की आलोचना की है. ट्रेड युनियन की ओर से भी चेतावनी दी गई है कि सरकार के इन क़दमों का कड़ा विरोध किया जाएगा.

रिपोर्टे: एजेंसियां/उभ

संपादन: ओ सिंह

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