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दुनिया

महंगा पड़ जाता है दलाई लामा का स्वागत

हमेशा एक ही किस्सा. दलाई लामा पश्चिम के किसी देश में आते हैं, बड़े नेताओं की ओर से उनका स्वागत होता है. चीन कहता है कि इसका नतीजा बुरा होगा. जर्मनी के दो शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि कम से कम आर्थिक नतीजा बुरा होता है.

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सन 2008 में गोएटिंगेन विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री नील्स हेंड्रिक क्लान और आंद्रेयास फुख्स के मन में यह विचार आया कि ओलंपिक मशाल के जलूस के दौरान पैरिस में हुए प्रदर्शनों के बाद चीन की प्रतिक्रिया का क्या असर पड़ा था. चीन और फ्रांस के बीच संबंधों में उसके बाद काफी ठंडक आ गई थी. दोनों अर्थशास्त्री जानना चाहते थे कि क्या इसका वैज्ञानिक आकलन

Dalai Lama feiert 75. Geburtstag in Indien

संभव है? उन्होंने आंकड़े इकट्ठे किए और पता चला कि दलाई लामा के औपचारिक स्वागत के बाद चीन में निर्यात काफी मात्रा में घट जाता है. इसकी जानकारी देते हुए नील्स हेंड्रिक क्लान कहते हैं:

ठीक ठीक कहा जाए तो हमने पाया कि जितने बड़े नेता दलाई लामा का स्वागत करते हैं, व्यापार पर उसका उतना ही नकारात्मक असर पड़ता है.

क्लान और फुख्स ने दूसरे देशों के आंकड़े भी जुटाए. दलाई लामा कहां कहां गए, किसने उनका स्वागत किया. फिर इसका चीन के साथ व्यापार पर क्या असर पड़ा. उन्होंने पाया कि दलाई लामा के स्वागत के बाद चीन में उस देश का निर्यात औसतन आठ फीसदी घट जाता रहा है. यह बात खासकर मशीनों और परिवहन के साधनों, मसलन जहाजों और विमानों की बिक्री पर लागू होती है. लेकिन इसके कारणों के बारे में कुछ पता नहीं चल सका. नील्स हेंड्रिक क्लान कहते हैं:

आम तौर पर साधारण नागरिक इन चीजों को नहीं खरीदते हैं. हमारा ख्याल है कि दलाई लामा के स्वागत के बाद ऐसे देशों में चीन के व्यापार प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं घट जाती हैं.

मिसाल के तौर पर फ्रांस. सन 2008 में राष्ट्रपति निकोला सारकोजी ने दलाई लामा का स्वागत किया था और उसके बाद चीन ने यूरोपीय संघ व चीन की शिखर भेंट को रद्द कर दिया. यूरोप में चीन का एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल आ रहा था. उसकी यात्रा के कार्यक्रम से फ्रांस को निकाल दिया गया. लेकिन क्लान का कहना है कि आम तौर पर दो साल के बाद संबंध फिर सामान्य हो जाते हैं:

ऐसी ठोस मिसालें हैं कि चीन की सरकार के साथ बेहतर संबंधों के लिए बाद में काफी राजनयिक प्रयास किए जाते हैं और फिर व्यापार संबंध सुधरने लगते हैं.

इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि सन 2002 में हू जिनताओ का शासनकाल शुरू होने के बाद से दलाई लामा के स्वागत का नकारात्मक प्रभाव बढ़ गया है. इसके कारण के बारे में अध्ययन में कुछ बताया नहीं गया है. वैसे नील्स हेंड्रिक क्लान का मानना है कि इसी दौर में विश्व स्तर पर चीन का आर्थिक प्रभाव भी बढ़ा है. जहां तक पश्चिम के नेताओं का सवाल है तो वे चाव से दलाई लामा का स्वागत करते हैं, क्योंकि इससे उनकी छवि बनती है. दूसरी ओर, वे यह भी नहीं चाहते कि देश के अर्थजगत को नुकसान पहुंचे. कभी कभी वे चाल भी चलते हैं. मिसाल के तौर पर बिल क्लिंटन के दौर में दलाई लामा को ह्वाइट हाउस में आमंत्रित किया गया, पर कहा गया कि उनकी भेंट राष्ट्रपति से नहीं, बल्कि एक मंत्री से होगी. लेकिन जब मंत्री महोदय से दलाई लामा की बात चल रही थी, तो अचानक राष्ट्रपति क्लिंटन वहां टपक पड़े.

रिपोर्ट: डानहोंग झांग/उभ

संपादन: वी कुमार

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