1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मसूद अजहर के मुद्दे पर चीन ने भारत को दिया दो टूक जवाब

चीन ने कहा है कि वह एनएसजी में भारत के प्रवेश के मुद्दे पर बात करने को तैयार है, लेकिन आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर यूएन में प्रतिबंध की भारत की कोशिश का उसने फिर विरोध किया है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी हफ्ते गोवा में होने वाले ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इससे ठीक पहले चीन ने मसूद अजहर के मुद्दे पर कहा है कि वो "आतंकवाद से निपटने के मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए" इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ है.

चीन के विदेश उप मंत्री ली पाओतोंग ने कहा है कि 48 सदस्यों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश को लेकर आम सहमति बनानी होगी. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच होने वाली मुलाकात में एनएसजी के मुद्दे पर बात होगी तो उन्होंने कहा कि एनएसजी के नियमों के मुताबिक आम सहमति से ही नए सदस्यों का प्रवेश हो सकता है.

भारत के प्रवेश पर चीन की आपत्तियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "इस बारे में सिर्फ चीन तो फैसला नहीं कर सकता. इस मुद्दे पर चीन और भारत के बीच अच्छा संपर्क रहा है और हम आम सहमति बनाने के लिए भारत के साथ बात करने को तैयार हैं. उम्मीद है कि भारत अन्य सदस्यों से भी संपर्क करेगा."

भारत ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा है कि एक देश उसकी एनएसजी सदस्यता की राह में रोड़ा है, लेकिन हाल के दिनों में मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों देशों ने बात की है. भारत से बात करने के बाद चीन ने पाकिस्तान से भी बात की है. वो भी प्रभावशाली समूह एनएसजी का हिस्सा बनना चाहता है.

जब मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में बैन के लिए भारत की कोशिशों में चीन की आपत्तियों के बारे में पूछा गया तो ली ने चीन के रुख को साफ करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "चीन हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ है. आतंकवाद से निपटने के मामले में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए. और न किसी को आतंकवाद से निपटने ने नाम पर राजनीतिक फायदे हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए."

भारत ने पठानकोट सैन्य बेस पर हमले के बाद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंधों के लिए अभियान शुरू किया, लेकिन चीन के एतराज के बाद बात आगे नहीं बढ़ सकी.

एके/वीके (पीटीआई)

DW.COM

संबंधित सामग्री