मशीन को बातचीत के लिए इंसानी हावभाव सिखाने की कोशिश | विज्ञान | DW | 23.12.2016
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विज्ञान

मशीन को बातचीत के लिए इंसानी हावभाव सिखाने की कोशिश

क्या आप जानते हैं कि कई बार उंगलियों से किए जाने वाले इशारे, किसी दूसरे देश में मुश्किल में डाल सकते हैं? रिसर्चर अलग अलग संस्कृतियों के लोगों के बीच संवाद की ऐसी ही दिक्कतों को कम करने के लिए खास तरीके निकाल रहे हैं.

दुनिया ग्लोबल हो चुकी है. हर देश और संस्कृति के लोग पूरी दुनिया में फैल चुके हैं. एक दूसरे के साथ रह रहे हैं. ऐसे में, गलतफहमी से कैसे बचा जाए? कैमरून के एरिक और उनके चाइनीज रूम पार्टनर शू के बीच ऐसा ही कनफ्यूजन खाना खाने के तरीके पर हुआ. खाना चॉपस्टिक से खाया जाए, छुरी कांटे से या फिर हाथ से? यह ऐसी बाधा है जिसे संवाद से ही दूर किया जा सकता है. लेकिन उससे पहले, हम इंसानों को तकनीक को समझना होगा. कंप्यूटर साइंटिस्ट एलिजाबेथ आंद्रे इसी पर काम कर रही हैं. आउग्सबुर्ग यूनिवर्सिटी में वह अपनी टीम के साथ यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि मोबाइल फोन, टैबलेट या फिर कंप्यूटर के जरिए कैसे असरदार संवाद कर सकते हैं. वह कहती हैं कि अच्छा तो तब होगा जब इंसान और मशीन के बीच संवाद हो और इंसान को पता भी न चले कि वह मशीन के साथ बात कर रहा है.

लेकिन चुनौती यह है कि मशीन को इंसान की भावनाएं कैसे समझाई जाएं. इसके बिना मशीन मौके और माहौल के उपयुक्त जवाब नहीं दे सकेगी. प्रोफेसर आंद्रे की टीम अब कंप्यूटर को कई हाव भाव और उनके मतलब सिखा रही है. फिलहाल ये सारी जानकारी कंप्यूटर एक नई लैग्वेंज की तरह स्टोर कर रहा है. कंप्यूटर उन्हें सीखता है और फिर अप्लाई करने के लिए तैयार होता है. लेकिन चेहरे के भाव अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं. अब तक मशीनें खुशी से भरी मुस्कान और खिसियाई हंसी में अंतर करने में नाकाम रही हैं. हो सकता है कि नया सॉफ्टवेयर इस मुश्किल को सुलझा दे. प्रोफेसर आंद्रे कहती हैं, "सही ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए यह जरूरी है कि मशीन यूजर की परिस्थिति को समझे और फिर यूजर के नजरिए से ही उस हालात की समीक्षा करे."

लेकिन चेहरे और शरीर के हाव भाव भी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं. पहली बार इस तरह के अंतर इंटरएक्टिव रोल प्ले के दौरान ही सामने आ जाते हैं. यूजर, एक वर्चुअल कैरेक्टर के साथ बातचीत करते हुए विदेशी संस्कृति के बारे में जान सकता है. हाव भाव वाले खेल में यूजर अपने व्यवहार को काबू करता है. विपरीत हाव भाव टकराते हैं. चेहरा हिलाना, विनम्र अभिवादन या मुड़ी हुई बाहें- आखिर कब कैसे हाव भाव सटीक बैठते हैं. आंद्रे के शब्दों में एक आयाम पावर डायमेंशन है, जो दिखाता है कि आज भी एक समाज में पदक्रम कितना मजबूत है. अकेले में कैरक्टर्स इसी के मुताबिक व्यवहार करते हैं.

वैसे इंसानों के बीच ऐसी कोई दिक्कत नहीं है. जैसे चाइनीज और अफ्रीकी रूम पार्टनर एरिक और शू एक दूसरे की संस्कृतिक बिना किसी तकनीक के भी समझ पा रहे हैं क्योंकि वे एक दूसरे के साथ बहुत समय बिताते हैं.

 

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