1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

मशीनों से बात करेंगी मशीनें

कार ऐसी हो, जो बीमा कंपनी को बता सके कि आप कैसे ड्राइवर हैं, वजन नापने की मशीन वजन को कंप्यूटर में पहुंचा सके और मीटर ऐसा कि बिजली बिल बढ़ने पर एयर कंडीशन को सलाह दे सके. वायरलेस क्रांति के नए दौर में आपका स्वागत है.

वायरलेस का पहला दौर वह था, जब मोबाइल फोन आए. लोग बिना तारों वाले फोन से एक दूसरे से संपर्क कर पाए. लेकिन दूसरा दौर मशीन से मशीन के संवाद का आने वाला है. इसमें इंसान बीच में पड़ेगा ही नहीं. इस साल बार्सिलोना में चल रहे मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में इन्ही सवालों पर चर्चा चल रही है.

वोडाफोन ग्रुप पीएलसी के सीईओ विट्टोरियो कोलाओ का कहना है, "मैं देख रहा हूं कि पूरा उद्योग बदल रहा है. कार से लेकर हेल्थ और लॉजिस्टिक्स, हर कुछ रीडिजाइन हो रहा है."

कंपनियों का मानना है कि एम2एम यानी मशीन टू मशीन तकनीक सभी तरह की सेवाएं दे सकें. आलम यहां ऐसा दिख रहा है कि कॉफी बनाने वाली मशीन को एक टैबलेट कंप्यूटर से आदेश दिया जा सकता है कि वह खास तरह की कॉफी बनाना शुरू कर दे. इंटरनेट से जुड़ी अलार्म घड़ी तो फीकी बात हो गई है. कोस्टा रीका के पूर्व राष्ट्रपति भी स्पेनी शहर बार्सिलोना के इस मेले में मौजूद थे. उनका कहना है कि एम2एम की मदद से पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है और खतरनाक गैसों के उत्सर्जन पर काबू पाया जा सकता है.

क्या है एम2एम

एम2एम उस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत मशीनों का एक वैश्विक नेटवर्क "इंटरनेट ऑफ थिंग्स" तैयार किया जाए, जिसमें न सिर्फ कंप्यूटर, टैबलेट और फोन जुड़े हों, बल्कि जिससे मोटर साइकिल, कार, वॉशिंग मशीन, सब कुछ जुड़ा हो. ब्रिटिश कंपनी मशीना रिसर्च का अनुमान है कि 2020 तक दुनिया भर में 12.5 अरब "स्मार्ट कनेक्शन" होंगे, जिनमें कंप्यूटर या टैबलेट शामिल नहीं है. अभी ऐसे कनेक्शन की संख्या करीब सवा अरब है.

लेकिन यह होगा कैसे और किसको इससे फायदा पहुंचेगा. सबसे पहले उपकरण ऐसे बनाने होंगे, जिन्हें कनेक्ट किया जा सके. इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि लोग अपनी वॉशिंग मशीन या महंगे टेलीविजन को हर साल अपडेट नहीं कर सकते हैं. सेलफोन और टैबलेट तो लोग बदल लेते हैं.

दूर से नियंत्रण

लॉस एंजिलिस की टेथरसेल नाम की कंपनी ने बैटरी से चलने वाले उपकरणों के लिए एक योजना बनाई है. इसने एक "नकली" डबल ए बैटरी बनाई है, जिसमें ट्रिपल ए साइज की बैटरी समा सकती है. यानी जिन उपकरणों में डबल ए बैटरी लगती है, उन्हें इस जैकेट वाली बैटरी से भी चलाया जा सकता है. इन्हें 80 फीट की दूरी से कंट्रोल किया जा सकता है और एक बटन दबा कर उन उपकरणों को ऑन या ऑफ किया जा सकता है, जिनमें ये बैटरियां लगी हैं. यानी अगर किसी का नटखट बच्चा बहुत आवाज वाले खिलौने से खेलता है, तो मां बाप चुपचाप दूसरे कमरे से उसके खिलौनों को खामोश कर सकते हैं.

इसी तरह आग बुझाने वाली मशीन अलार्म बजा सकती है कि उसकी बैटरी कमजोर हो रही है. मुश्किल यह है कि शुरुआत में यह काफी महंगी है, करीब 35 डॉलर. लेकिन कंपनी के सह संस्थापक केलन ओकोनर का कहना है कि दाम 10 डॉलर तक पहुंच सकते हैं. हालांकि यह भी सस्ता तो नहीं है.

आगे पढ़ें...

DW.COM