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दुनिया

मलाला को यूरोपीय संघ का पुरस्कार

नोबेल पुरस्कारों के एलान से एक दिन पहले ही मलाला युसुफजई को यूरोपीय संघ के प्रतिष्ठित सखारोव मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित करने का एलान किया गया. यूरोपीय संसद के सदस्य इस पुरस्कार का विजेता वोटिंग से तय करते हैं.

हालांकि इस पुरस्कार के मिलने के बाद मलाला को नोबेल मिलने की संभावना के और कमजोर पड़ने की बात कही जा रही है. नोबेल पुरस्कारों के लिए इस साल रिकॉर्ड 259 नामांकन हुए हैं, जिनमें बताया जाता है कि पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई का नाम भी शामिल है, जिसे तालिबान ने पिछले साल गोली मार दी थी. हालांकि बाद में पाकिस्तान के सैनिक अस्पताल और ब्रिटेन में इलाज के बाद वह चंगी है.

शांति पुरस्कारों और दूसरे नोबेल पुरस्कारों के लिए नामांकन का काम जनवरी में ही पूरा हो जाता है, लिहाजा इसके बाद के नामों पर चर्चा नहीं की जाती. ओस्लो को पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख क्रिस्टियान बर्ग हार्पविकेन ने हालांकि अपनी अलग सूची बनाई है, जिसमें पहले नाम पर मलाला का नाम है. यह सूची उनकी वेबसाइट पर भी है. हार्पविकेन का कहना है, "वह सिर्फ लड़कियों और महिला शिक्षा और सुरक्षा की पहचान नहीं बनी है, बल्कि आतंकवाद और दबाव के खिलाफ लड़ने की प्रतीक भी बन चुकी है."

Schweden Kongo Denis Mukwege erhält Alternativer Nobelpreis 2013

कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे

बच्ची को पुरस्कार!

कई लोगों का कहना है कि सिर्फ 16 साल की उम्र में मलाला के लिए यह पुरस्कार बहुत भारी होगा और अभी से नहीं कहा जा सकता है कि क्या वह जिंदगी भर इसकी प्रतिष्ठा को संभाल पाएगी. स्टॉकहोम शांति रिसर्च सिपरी के टिलमन ब्रुएक का कहना है, "मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि किसी बच्चे को यह पुरस्कार देना सैद्धांतिक रूप से ठीक होगा." उनका कहना है कि कोलंबिया के शांति वार्ताकारों या म्यांमार में बदलाव करने वाले लोगों को यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए.

हार्पविकेन की सूची में मलाला के अलावा रूस के मानवाधिकारों की महिला तिकड़ी ल्यूडमिला अलेक्सेयेवा, स्वेतलाना गनुशकिना और लिल्या शिबानोवा का नाम है. इसमें तीसरे नंबर पर यूगांडा की सिस्टर मेरी टरसीसिया लोकोट, उसके बाद ग्वाटेमाला की क्लाउडिया पेजी पाज और पांचवें नंबर पर कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे का नाम है. मुकवेगे को छोड़ कर पहले चारों स्थान पर हार्पविकेन ने महिलाओं के नाम रखे हैं. वह पिछले चार पांच साल से यह सूची बना रहे हैं और अब तक उनका तुक्का नहीं भिड़ा है.

महिलाओं का अस्पताल

मुकवेगे के नाम को कई लोग सहानुभूति की नजर से देख रहे हैं, जिन्होंने हजारों महिलाओं की मदद के लिए कांगो में एक अस्पताल बनाया है. ये बलात्कार पीड़ितों के अलावा विदेशी आतंकवादियों और सैनिकों से प्रताड़ित महिलाओं का इलाज होता है. इतिहासकार एसले स्वीन का कहना है, "कमेटी के पांच सदस्यों को कांगो के इस महिला रोग विशेषज्ञ के हक में वोट देना चाहिए."

Russische Menschenrechtlerin Svetlana Gannushkina

स्वेतलाना गनुशकिना

लेकिन इन कयासों के अलग सच्चाई तो यह है कि नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली समिति बंद कमरों में फैसले करती है और किसी को कानों कान इसकी भनक नहीं पड़ती. जनवरी में नामांकन के बाद से इन नामों पर अलग अलग स्तर पर विचार होता है और उनके काम को लेकर चर्चाएं होती हैं. बाद में कुछ नामों को छांट लिया जाता है और उन पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाता है. कई बार इस बात की मांग उठी है कि नोबेल शांति समिति में दुनिया भर के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि पुरस्कारों को लेकर कम से कम लोगों में मतभेद हो. लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है. इसमें आम तौर पर रिटायर नेता शामिल होते हैं.

विवाद वाले नाम

पिछले साल जब यूरो संकट में घिरे यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला हुआ, तो कई तरह के सवाल उठे. इसके अलावा 2009 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को उनके कार्यकाल के पहले ही साल में नोबेल पुरस्कार दिया गया था. उन्होंने तकनीकी तौर पर 20 जनवरी को पदभार संभाला था और नोबेल शांति पुरस्कार नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी होती है. इस तरह उनके राष्ट्रपति बनने के 10 दिन के भीतर ही उनका नाम भेज दिया गया था.

पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ सिखाने वाले महात्मा गांधी को नोबेल का शांति पुरस्कार नहीं दिया गया, जिसके लिए नोबेल शांति समिति बार बार माफी मांगती है. गांधीजी का नाम चार बार नामांकित किया गया, जिसमें 1948 का साल भी शामिल है. लेकिन 30 जनवरी को उनकी हत्या हो गई और नोबेल पुरस्कार सिर्फ जीवित लोगों को ही दिए जाते हैं. लिहाजा उनका नाम हटाना पड़ा.

एजेए/एनआर(रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

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