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विज्ञान

मरीज की कोशिका से ही इलाज

चूहे की सामान्य कोशिकाएं एक खास प्रयोग से मूल कोशिकाओं में बदल जाती हैं. यह रोचक शोध अचानक हो गया. शोधकर्ताओं को मूल कोशिकाएं बनाने की नई संभावना का पता लगा है.

मधुमेह और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर शोध के लिए मूल कोशिकाएं अहम भूमिका निभाती हैं. वैज्ञानिकों ने इस सप्ताह नेचर पत्रिका में बताया कि उन्हें एक ऐसा तरीका मिल गया है जिससे वे चूहे की परिपक्व कोशिकाओं को भ्रूण कोशिकाओं वाली स्थिति में ला सकते हैं. इससे कई तरह के ऊतक बनाए जा सकेंगे. शोध संकेत देता है कि आने वाले दिनों में वैज्ञानिक आसानी से मनुष्य की कोशिकाओं को रिप्रोग्राम कर सकेंगे यानी क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बदल सकेंगे या फिर चोटिल या बीमार लोगों के खराब हो रहे अंग को उगा सकेंगे.

इस शोध में जापान और इंग्लैंड में बर्मिंघम के वैज्ञानिक शामिल हैं जो रिकेन सेंटर फॉर डेवलपमेंटल बायोलॉजी इन जापान में काम कर रहे हैं. इनके साथ विमेन्स हॉस्पिटल और अमेरिका का हार्वर्ड मेडिकल स्कूल भी है. बर्मिंघम के चार्ल्स वैकैंटी ने कहा, "ऐसा करना बहुत ही आसान है, मुझे लगता है कि ये तो आप कॉलेज लैब में कर लेंगे." हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इससे क्लोनिंग का रास्ता खुल सकता है.

कई संभावनाएं

शोधकर्ताओं ने लिखा है कि उन्होंने चूहे की परिपक्व कोशिकाओं को बढ़ने दिया और फिर उन्हें तनाव में रखा, इतना कि वो नष्ट होने तक पहुंच जाएं. उन्हें प्रताड़ित किया गया, कम ऑक्सीजन पर रखा और फिर अम्लीय माहौल में रखा. कुछ दिन में वैज्ञानिकों को पता चला कि कोशिकाएं जिंदा हैं और प्राकृतिक रूप से विपरीत हालात से बाहर आने के लिए उन्होंने खुद को भ्रूण की मूल कोशिकाओं में तब्दील कर लिया है. तनाव पाकर बची इन कोशिकाओं का नाम वैज्ञानिकों ने एसटीएपी कोशिका रखा. इन्हें फिर अलग अलग कोशिकाओं और ऊतकों में विकसित किया गया.

कोबे, जापान के रिकेन में काम करने वाले वैज्ञानिक और शोध के सह लेखक हारुको ओबोकाता ने कहा कि वैज्ञानिक अब देख रहे हैं कि क्या यह तरीका इंसानों पर काम कर सकता है ताकि मरीज की कोशिकाओं से ही स्टेम सेल बनाए जा सकें और डॉक्टरों को प्रत्यारोपण रिजेक्ट होने का टेंशन नहीं हो. "अगर हम वो प्रणाली ढूंढ सकें जिससे अलग अलग स्थिति बनाई जा सकती है और खत्म की जा सकती हो, तो इससे जीवंत कोशिकाओं का इस्तेमाल कर नए शोध के लिए कई संभावनाएं बनेंगी."

उपयोगी शोध

शरीर की मूल कोशिकाएं यानी स्टेम सेल्स खुद को किसी भी तरह की कोशिका में विकसित कर सकती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऊतकों को रिजनरेट करने से कई बीमारियों का इलाज ढूंढा जा सकता है, जिनके लिए अभी सीमित विकल्प मौजूद हैं. स्ट्रोक, दिल की बीमारी और पार्किंसंस इसके उदाहरण हैं. मूल कोशिकाएं दो तरह की होती हैं, एक तो भ्रूण से ली हुई और एक वयस्क या आईपीएस कोशिकाएं जो त्वचा या खून से ली जाती हैं ताकि उन्हें भ्रूण की मूल कोशिकाओं में बदला जा सके.

Symbolbild Stammzellen

स्टेम सेल रिसर्च ने जगाई उम्मीद

लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में रिजनरेटिव मेडिसिन बायोप्रोसेसिंग के अध्यक्ष क्रिस मेसन शोध के तरीके को प्लरिपोटेंट सेल बनाने का "एकदम आसान, सस्ता और तेज तरीका" बताते हैं. प्लरिपोटेंट सेल्स वो होते हैं जो खुद को अलग अलग कोशिकाओं में विकसित सकती हैं. मैसन कहते हैं, "अगर यह इंसान में काम करेगा तो आमूलचूल परिवर्तन हो जाएगा और इससे कई सेल थैरेपी विकसित हो सकेंगी जिसमें मरीज की खुद की कोशिकाओं से ही उसका इलाज किया जा सकेगा. व्यक्तिगत मेडिसिन का दौर तब आ जाएगा."

इस साल की शुरुआत में जर्मन वैज्ञानिकों ने ल्युकेमिया का इलाज मूल कोशिकाओं से कर पाने में सफलता दर्ज की थी.

रिपोर्टः मिलान गैगनन/एएम

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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