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दुनिया

ममनून बने पाक राष्ट्रपति

ममनून, इस शब्द का मतलब है शुक्रगुजार. अचानक से पाकिस्तान की सियासत पर छा जाने वाले नए राष्ट्रपति ममनून हुसैन आज अगर किसी के सबसे ज्यादा शुक्रगुजार होंगे, तो वह हैं प्रधानमंत्री नवाज शरीफ.

73 साल के हुसैन नौ सितंबर को पाकिस्तान के 12वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे. वह आसिफ अली जरदारी की जगह पद संभालेंगे, जो अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद हट रहे हैं.

कपड़े के व्यापारी और आम तौर पर पर्दे के पीछे से राजनीति करने वाले ममनून हुसैन को मुस्लिम लीग नवाज के साथ लंबी वफादारी और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की नजदीकी का तोहफा मिलता बताया जा रहा है. पिछले दिनों आम चुनाव के बाद ही उन्होंने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जो इस बात के पहले संकेत थे कि वह अपने को निष्पक्ष साबित करते हुए राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकते हैं.

आगरा वाले ममनून

आगरा में ममनून की पैदाइश 1940 में उस वक्त हुई, जब हिन्दुस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था. भारत की आजादी और देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार कराची चला गया, जहां उनके घरवालों ने कपड़े की इंडस्ट्री लगाई. उन्होंने कुछ दिनों तक तो इस्लामी पढ़ाई की लेकिन 1960 की दहाई में कराची से बिजनेस मैनेजमेंट किया और कुछ ही दिनों में राजनीति से जुड़ गए.

वह शुरू से ही नवाज शरीफ की पार्टी यानी मुस्लिम लीग से जुड़ गए यानी वह 50 साल से पार्टी के वफादार हैं. 1999 में जब नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बने, तो उन्हें कुछ दिनों के लिए सिंध का गवर्नर बनने का मौका भी मिला. हालांकि बाद में सैनिक तख्ता पलट के बाद शरीफ के साथ उनकी कुर्सी भी चली गई.

हुसैन के लिए आदर्श देश

ममनून को जानने वाले उन्हें एक संतुलित व्यक्ति और लोकतंत्र के पक्के समर्थक बताते हैं, जो प्रतिद्वंद्वी देश भारत के संगीत से प्यार करते हैं. पाकिस्तान में भारत की तरह राष्ट्रपति सिर्फ औपराचिक प्रमुख का पद होता है, पर उसे सरकार और प्रभावशाली सेना के बीच पुल की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

हुसैन का कहना है, "मुझे पता है कि पाकिस्तान में नागरिक और सैनिक दरार बहुत बड़ी मुश्किल है और मैं कोशिश करूंगा कि ऐसा दोबारा न हो. मैं अपनी प्राथमिकताएं तय कर रहा हूं." ममनून हुसैन मलेशिया के लोकतंत्र को किसी मुस्लिम देश के लिए आदर्श के रूप में देखते हैं, जबकि यूरोपीय संघ को राजनयिक कामयाबी का पैमाना समझते हैं.

वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पर अपने वक्त में सत्ता का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने का आरोप है. जरदारी की पार्टी यानी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने इस बार के राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया था क्योंकि इसकी तारीख छह अगस्त से पहले कर दी गई थी. जरदारी पर भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उन्हें संविधान से हर प्रकार की माफी मिली हुई थी. अब उनके पद से हटने के बाद उनके खिलाफ दोबारा मामला शुरू हो सकता है.

पाकिस्तान के अलग राष्ट्र के गठन के बाद उसका ज्यादा वक्त सैनिक शासन में बीता. शुरू के 10 बरसों तक वहां गवर्नर जनरल का पद रहा, जिसके बाद 1958 में इसकंदर मिर्जा देश के पहले राष्ट्रपति बने. इसके बाद अय्यूब खान, यहया खान, जुल्फिकार अली भुट्टो और परवेज मुशर्रफ भी इस पद पर रहे.

एजेए/एमजी (रॉयटर्स, डीपीए)

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