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दुनिया

मनमोहन सिंह का इस्तीफा चाहती थी बेटी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार ने फिर एक खुलासा किया है. प्रधानमंत्री की बेटी चाहती थीं कि उनके पापा इस्तीफा दे दें. उनका गुस्सा राहुल गांधी पर था.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दागी नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत देने वाले अध्यादेश को फाड़ने से बहुत आहत हुई थीं और वह चाहती थी कि इसके बाद पापा को इस्तीफा दे देना चाहिए था.

प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारु ने यह दावा अपनी विवादास्पद किताब 'द ऐंक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टिर' के लॉन्च के समय किया.

मंत्रिमंडल के इस फैसले को राहुल गांधी के ऐतराज के बाद उलट दिया गया था. राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस अध्यादेश को 'बकवास' करार देते हुए इसे वहीं फाड़ दिया था.

कई बार दिया सुझाव

बारु ने कहा कि 2009 में जब यूपीए सरकार सत्ता में आई तब भी प्रधानमंत्री की बेटी ने उन्हें कई बार इस्तीफा देने का सुझाव दिया था. उन्होंने बताया कि गांधी के अध्यादेश फाड़ने की घटना के बाद ''मैं टेलीविजन पर आया और कहा था कि प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. इसके बाद मुझे प्रधानमंत्री की बेटी की तरफ से एक संदेश आया, जिसमें उन्होंने मेरी बात से सहमति जताते हुए कहा कि वह मेरी सलाह से इत्तिफाक रखती हैं.''

हालांकि बारु ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि प्रधानमंत्री की दोनों बेटियों में से किस ने इस्तीफा देने पर सहमति व्यक्त की थी. बारु ने कहा कि डॉ. सिंह का यह विश्वास था कि 2009 के आम चुनाव में यूपीए की जीत उनकी जीत है.

टांग पर टांग चढ़ाकर बैठे

उन्होंने कहा "इससे पहले मैंने कभी डॉ. सिंह को टांग पर टांग चढ़ाकर बैठे नहीं देखा था. लेकिन दो जून 2009 को जब मैं प्रधानमंत्री से मिला तो वह इस तरह बैठे थे और अपनी जीत को बयां कर रहे थे. लेकिन इस जीत के लिए उन्हें किसी ने श्रेय नहीं दिया. यहां तक की मेरे दोस्त पृथ्वीराज चव्हाण जिन्हें डॉ. सिंह ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री के रुप में लाए थे उन्होंने तक इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री को न देकर राहुल गांधी को दिया था.''

बारु का कहना था कि उनकी पुस्तक भारतीय राजनीति में एक अनोखे प्रयोग का विश्लेषण है, ''ऐसा प्रयोग जो पहले पांच साल तो सफल रहा और उसके बाद के पांच साल में विफल हो गया.'' बारु के मुताबिक प्रधानमंत्री द्वारा पार्टी मुखिया को रिपोर्ट करने की परंपरा खत्म हो चुकी थी.

प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार ने एक और ऐसी घटना का जिक्र किया जिसका उल्लेख किताब में नहीं है. बारु का दावा है कि 2007 में जब लक्ष्मी मित्तल फ्रांसीसी कंपनी आर्सेलर का अधिग्रहण कर रहे थे, उस समय प्रधानमंत्री ने आगे आकर मित्तल के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति से बात की थी.

एएम/आईबी (वार्ता)

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