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डीडब्ल्यू अड्डा

मनमोहन के लिए शर्मनाक घोटाला

जर्मन भाषी अखबारों में भी भारत के 2जी स्पैक्ट्रम घोटोले की चर्चा है. खास कर प्रधानमंत्री के लिए इसे शर्मनाक करार दिया गया है. पाकिस्तान के आतंकी ढांचे और आईएसआई से इसके संबंधों पर भी कुछ अखबारों ने रोशनी डाली है.

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छवि पर दाग

ज्यूरिख के नोए जूएर्षर त्साइटुंग का कहना है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली भारत सरकार भ्रष्टाचार के कई मामलों की वजह से संसद में दबाव झेल रही है. साथ ही आम लोग भी सरकार से नाराज दिखते हैं. खासकर मोबाइल फोन के लाइसैंस घोटाले की वजह से गुस्सा बढ़ रहा है. अखबार का कहना है कि हाल ही में हुए घोटालों में से 2जी स्पैक्ट्रम घोटाला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए सबसे शर्मनाक है जिन्होंने छह साल पहले पद संभाला.

हालांकि सत्ताधारी गठबंधन को किसी घोटाले की वजह से कोई गंभीर खतरा नहीं है क्योंकि संसद में उसके स्पष्ट बहुमत प्राप्त है. लेकिन इससे कांग्रेस पार्टी की छवि को तो ठेस पहुंच ही सकती है. 2009 में सबसे बड़ी पार्टी बन कर सत्ता में लौटने वाली कांग्रेस ने वादा किया था कि वह अपने कार्यकाल में आर्थिक वृद्धि के फायदे सभी लोगों तक पहुंचाना चाहती है. तब से सरकार ने गरीबी को

Flash-Galerie Liberalisierung Telekommunikation

दूर करने के लिए कई कार्यक्रमों में निवेश किया. लेकिन यह बात किसी से नहीं छिपी है कि आज भी सरकार के बजट का एक बहुत बडा हिस्सा भ्रष्ट अधिकारियों की जेबों में जाता है. इसी वजह से भारत के बहुत सारे मतदाता निराश और दुखी हैं.

माइक्रो क्रैडिट का संकट

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में प्रकाशित होने वाले फ्रैंकफुर्टर आलगेमाईने त्साइटुंग का कहना है कि भारत में माइक्रो क्रैडिट क्षेत्र में काफी उथल पुथल देखने को मिल रही है. भारत में दिए जाने वाले कुल माइक्रो क्रैडिट में से 35 फीसदी आंध्र प्रदेश में दिए जाते हैं. लेकिन राज्य के 60 लाख गरीब अत्यधिक कर्ज में दबे हैं. आंध्र प्रदेश में नए कानून लागू किए गए हैं क्योंकि ऐसे किसानों की संख्या बढ़ रही है जो हताशा में आत्महत्या कर रहे हैं. अखबार का कहना है कि माइक्रो क्रैडिट के क्षेत्र में राजनीति के प्रवेश से ही सारी समस्याएं पैदा हो रही हैं. बड़े बैंक छोटे बैंकों को लाखों का समर्थन देते हैं. अब, अपनी पूंजी के डर की वजह से उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया है.

यह भी पता चला है कि माइक्रो क्रैडिट देने वाले बैंकों ने गरीबों का फायदा उठाया है. उन्होंने 15 फीसदी ब्याज पर बडे बैंकों से कर्जा लिया है, लेकिन गरीबों से वे 30 फीसदी की दर से ब्याज वसूल रहे हैं. इस समस्या पर इसलिए भी सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि नामी बैंक इसका शिकार बन रहे हैं. उन्हें लगता था कि माइक्रो क्रैडिट के क्षेत्र में निवेश करने से उनकी छवि को फायदा पहुंच सकता है.

यूरोप को भी खतरा

दो साल पहले भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए हमलों में 10 आतंकवादियों के हाथों 166 लोग मारे गए. यूरोपीय सुरक्षा अधिकारी काफी दिनों से चिंतित हैं कि यूरोप में भी इस तरह के हमले न हों जैसा कि दो साल पहले आतंकवादी गुट लश्कर- ए- तैयबा ने मुंबई पर किए थे. कैद जर्मन जिहादियों का कहना है कि 15 से 20 लड़ाके महीनों से यह तैयारी कर रहे हैं कि कैसे यूरोप के बड़े शहरों में एक साथ हमले किए जाएं.

म्यूनिख से छपने वाले जर्मनी के सबसे प्रसिद्ध अखबारों में से एक ज्युड डॉयचे त्साइटुंग का कहना है कि जर्मनी के एक उच्च अधिकारी का मानना है कि

Indien Terroranschläge Mumbai Bombay Terror Gedenken 26/11 Flash-Galerie

मुंबई हमलों को दो साल पूरे हुए

मुंबई के हमले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद के बगैर मुमकिन नहीं थे. उस वक्त हमलावरों को आदेश पाकिस्तान से मिल रहे थे. उन्हें कई महीनों तक विशेष कैंपों में ट्रेनिंग दी गई. आतंकवादियों को यह ट्रेनिंग आईएसआई के संदिग्ध सदस्यों ने दी. ऐसी आतंकवादी योजना को नजरंदाज करना या खुलेआम उसका समर्थन करना यूरोप के अधिकारियों की तरफ से नहीं लग रहा है.

पाकिस्तान का घायल दिल

पाकिस्तान का बंदरगाह शहर कराची, जहां मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान का दिल धडकता है, कई हफ्तों से हिंसा का शिकार रहा है. यह कहना है जर्मनी की सबसे मशहूर साप्ताहिक पत्रिका डेयर श्पीगल का. कराची का महत्व इसलिए इतना ज्यादा है क्योंकि पश्चिमी देशों से उसके बंदरगाह के जरिए ही अफगानिस्तान में लड़ रहे नाटो सैनिकों के लिए समान भेजा जाता है. लेकिन कराची की झुग्गी बस्तियां और कई दूसरे इलाके अब अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बन रहे हैं.