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मंथन

मदद के साथ साथ मुखबिरी करती मशीनें

गूगल होम और एमेजॉन एको जैसी मशीनें घरों को स्मार्ट बना रही हैं. लेकिन इन मशीनों के कान होते हैं जो सब कुछ सुनते और रिकॉर्ड करते रहते हैं. डाटा सुरक्षा दांव पर है.

घर का बहुत सा काम रोबेर्टो की एक पुकार पर हो जाता है. बर्लिन के इस नौजवान की मदद एक छोटी सी मशीन करती है. हे गूगल कहते ही मशीन एक्टिव हो जाती है, रोबेर्टो जो कहें, वो करने लगती है. रोबेर्टो मानसानो इससे अपना मददगार मानते हैं, "मैं इसे ऐसे इस्तेमाल करता हूं कि यह मेरा रोजर्मरे का काम आसान बनाती है. चाहे रेडियो ऑन करना हो या म्यूजिक चलाना या फिर टेलिफोन आने पर खुद पूरे घर का म्यूजिक बंद करना. जब मैं जाता हूं तो ये सभी लाइटें भी ऑफ करती है."

ज्यादा से ज्यादा लोग गूगल होम या एमेजॉन एको जैसे वॉयस असिस्टेंट खरीद रहे हैं. ये मशीनें एक कोड से एक्टिवेट होती है, वे इंसानी पुकार को क्लाउड पर प्रोसेस करती हैं और फिर एक महिला की मीठी आवाज में जवाब देती हैं. लेकिन रिकॉर्ड किये गए सारे डाटा के साथ क्या होता है, बहुत से लोगों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं. जर्मनी के आईटी सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट एवी-टेस्ट ने एमेजॉन की मशीन में इसकी जांच की. हैकिंग के खिलाफ मशीन में पुख्ता इंतजाम हैं. लेकिन डाटा सिक्योरिटी को लेकर एक्सपर्ट फिर भी चिंतित हैं.

आईटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक मशीन भले ही म्यूट भी रहे, लेकिन इसके बावजूद यह डाटा भेजती रहती है. इंटरनेट कंपनियां लोगों का डाटा जमा करती हैं, ये बात नयी बिल्कुल नहीं है. लेकिन वॉयस असिस्टेंट यूजर की निजी जिंदगी में बेहद गहराई तक जा सकता है. आईटी एक्सपर्ट माक्सिमिलियन फॉन ग्राफेनश्टाइन इसे बड़े आराम से समझाते हैं, "इसकी शुरुआत इंसान की टोन को पहचानने से होती है, टोन से पता चल जाता है कि किसी का मूड कैसा है. एक दूसरा उदाहरण है कि इंसानी व्यवहार के पैटर्न का पता चलता है. मसलन मैं आम तौर पर कब घर आता हूं."

बच्चों के इसके संपर्क में आते ही खतरा और बढ़ जाता है. इस ब्रिटिश गुड़िया का नाम कायला है, यह भी बिल्कुल ऐसी मशीनों की तरह काम करती है. जर्मनी की एक दुकान ऐसी गुड़िया बेच रही थी. यह बातचीत तक रिकॉर्ड कर सकती थी. जर्मन नेटवर्क एजेंसी को जब इसका पता चला तो उसने कार्रवाई की और गुड़िया की सेल पर रोक लगा दी. चारों और बढ़ती ऐसी मशीनों के दौर में डाटा की सुरक्षा कैसे की जाए?

आईटी एक्सपर्ट ग्राफेनश्टाइन कहते हैं, "मैं उन्हें पहली सलाह प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ने की दूंगा. इसके बाद लोग पर्सनल सिक्योरिटी सेटिंग कर सकते हैं. जैसे, हर वक्त मशीन को ऑन न रहने देना. और जब कभी मेहमान आएं तो उन्हें बताना कि हम जो कुछ भी यहां बोल रहे हैं वो इस मशीन में रिकॉर्ड होगा."

रोबेर्टो ने भी सिक्योरिटी सेटिंग की है. समय समय पर वह अपनी गूगल एक्टिविटी के लॉग को डिलीट करते रहते हैं. वह कुछ और कदम भी उठा रहे हैं, "अगर मुझे यह अहसास हुआ कि मैं यहां ऐसी मशीन बिल्कुल नहीं चाहता जो सब सुने तो इसमें एक फंक्शन है, माइक्रोफोन को ऑफ करने का. लेकिन मुझे शक है कि इसके बावजूद नेटवर्क से इसका संपर्क बना रहता है."

अगर आपको गूगल होम पंसद है तो भी सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि डाटा सिक्योरिटी का गेट न टूटे.

(ड्रोन में उड़ेगा इंसान)

एलिस कोन/ओएसजे

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