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ताना बाना

मत भेजो जानवरों को अफगानिस्तान

भारत में जानवरों के हितों के लिए काम करने वाले लोग सरकार से मांग कर रहे है कि जंग की हालात से जूझते अफगानिस्तान में मासूम जीवों को न भेजा जाए.

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अफगानिस्तान से अधिकारी इन जानवरों को ले जाने के लिए भारत आए हुए हैं. अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के चिड़ियाघर को तालिबान शासन के दौरान काफी नुकसान पहुंचाया गया. अब वहां की सरकार भारत से दान में मिले तेंदुए और हाथियों से इस नुकसान को पूरा करना चाहती है. सरकार एक बार फिर इस चिड़ियाघर को आबाद करना चाहती है.

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इस बीच पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स यानी पेटा के कार्यकर्ता सरकार से इन जानवरों को वहां न भेजने की फरियाद कर रहे हैं. पेटा की भारतीय शाखा ने पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से इन जानवरों को न भेजने की गुहार लगाई है. पेटा की प्रवक्ता पूर्वा जोशीपुरा ने कहा, "काबुल के चिड़ियाघर की खराब हालत के बारे में सभी जानते हैं. जंगली जानवरों को दूर देश के खराब चिड़ियाघरों में भेजना उनकी रक्षा के लिए ली गई हमारी शपथ को तोड़ती है."

काबुल के चिड़ियाघर के निदेशक अजीज गुल साकिब ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि अफगानिस्तान ने एक हाथी, एक तेंदुआ और एक स्नो लियोपार्ड मांगा था. भारत सरकार ने हाथियों के रखरखाव में भी मदद करने की बात कही थी. साकिब ने बताया कि अधिकारियों के लिए इन जीवों को भारत से लाना भी एक मुश्किल काम है. जानवरों को लेकर जाने वाला काफिला पाकिस्तान से लगते उस इलाके से भी गुजरेगा जहां कानून व्यवस्था की हालत जर्जर है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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