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जर्मन चुनाव

मतदान के बाद रसीद

मतदान के बाद मतदाताओं के पास इस बात का कोई कागजी सबूत नहीं रहता कि उन्होंने मतदान किया है. लेकिन इस बार लोकसभा में कई जगहों पर ऐसी व्यवस्था की गयी.

इन चुनावों में मतदाताओं में नीली स्याही की दीवानगी काफी देखने को मिली. वोट देने के बाद लोग अपनी अंगुली की तस्वीर ले कर सोशल मीडिया पर भी डालते रहे हैं. कई छोटे बड़े मंत्रियों ने भी अखबारों और टीवी चैनलों के लिए बहुत गर्व से स्याही वाली उंगली दिखाई. लेकिन इन तस्वीरों को अगर छोड़ दिया जाए तो मतदाताओं के पास कोई भी लिखा हुआ सबूत नहीं होता.

इस बार चुनाव आयोग ने पहली बार लोकसभा चुनाव में मतदान के बाद मतदाताओं को रसीद देने की प्रणाली शुरू की है. हालांकि अभी यह व्यवस्था पूरे देश में लागू नहीं की जा सकी पर कुछ राज्यों में टेस्ट के तौर पर यह व्यवस्था शुरू की गयी है.

इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा मिजोरम में देखा गया जहां 385 मतदान केंद्रों पर इसका इस्तेमाल हुआ. आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश के 35, पटना साहिब के 30, गुजरात के गांधीनगर और दक्षिण बैंगलूर के 26, पश्चिम बंगाल के जादवपुर के 22 केंद्रों में रसीद दी गयी. इसके अलावा छत्तीसगढ के रायपुर के 8, और चेन्नई मध्य के 4 केंद्रों में भी यह प्रणाली शुरू की गयी. यह व्यवस्था भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड तथा ईसीआईएल ने लागू की है.

आईबी/एएम (वार्ता)

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