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जर्मन चुनाव

मणिपुर की नाकेबंदी तोड़ने के लिए सशस्त्र बल

भारत में केंद्र सरकार मणिपुर की आर्थिक नाकेबंदी को तोड़ने के लिए अब ताकत का इस्तेमाल करेगी. पिछले 60 दिनों से नागा कबीलों की ओर से इस प्रदेश की नाकेबंदी चल रही है.

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शांत घाटी में तनाव

केंद्रीय गृहसचिव जीके पिल्लई ने बताया है कि नाकेबंदी तोड़ने के लिए अब सशस्त्र बलों का प्रयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मंगलवार से ये सशस्त्र बल वहां भेजे जाएंगे. असम से लेकर मणिपुर तक नैशनल हाइवे 39 की पूरी लंबाई में ये नाकेबंदी तोड़ी जाएगी.

11 अप्रैल को नागा संगठनों की ओर से मणिपुर के ख़िलाफ़ अनिश्चित काल के लिए आर्थिक नाकेबंदी शुरू की गई थी. वे स्वशासित परिषद के चुनाव के राज्य सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे थे. 6 मई को स्थिति और बिगड़ी, जब मणिपुर की राज्य सरकार ने पृथकतावादी नागा नेता थुइंगालेंग मुइवा को उनके गांव में जाने से रोक दिया. सरकार का कहना था कि इस दौरे से सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठेगी.

नाकेबंदी की वजह से मणिपुर में ज़रूरी सामानों की भयानक कमी पैदा हो गई थी. ईंधन, ऑक्सीजन और दवाइयों के अभाव के कारण निजी अस्पताल बंद होने वाले थे. स्कूलों और दफ़्तरों में हाज़िरी में भारी गिरावट आ गई थी और सामानों की कीमतें आसमान छूने लगी थीं. खाद्य पदार्थों के भंडार भी ख़त्म होते दिख रहे थे.

लेकिन केंद्र सरकार के फ़ैसले को काफ़ी देर व आधे मन से लिया गया फ़ैसला कहा जा रहा है. शिलांग टाइम्स की संपादक पैट्रिसिया मुखिम का कहना है कि यह नाकेबंदी मानव अधिकारों का भारी उल्लंघन है.

पृथकतावादी नागा संगठनों की ओर से एक बृहद नागालैंड की मांग की जा रही है, जिसमें वे मणिपुर के चार ज़िलों को भी शामिल करना चाहते हैं. मणिपुर के लोगों के साथ-साथ केंद्र सरकार भी इस मांग के ख़िलाफ़ है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: राम यादव

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