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जर्मन चुनाव

मट्टू कांड में फांसी से बचा संतोष

बहुचर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू कांड का दोषी संतोष सिंह फांसी की सजा से बच गया. सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोषी तो माना है लेकिन मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया है.

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लगभग 14 साल पुराने मुकदमे की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई बातें दोषी संतोष सिंह के पक्ष में जाती हैं.

भारत की सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एसएस बेदी और जस्टिस सीके प्रसाद की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संतोष सिंह दोषी है. हालांकि बेंच ने कहा, "लेकिन हमें लगता है कि कई बातें संतोष सिंह के पक्ष में जा रही हैं. इसलिए हम मौत की सजा को उम्र कैद में बदल रहे हैं."

इस मामले के शुरू में निचली अदालत ने संतोष सिंह को बरी कर दिया. पर बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुना दी. संतोष सिंह एक वरिष्ठ आईपीएस ऑफिसर का बेटा है. उसने जनवरी, 1996 में बलात्कार करने के बाद प्रियदर्शिनी मट्टू की हत्या कर दी थी. प्रियदर्शिनी उस वक्त दिल्ली विश्वविद्यालय में लॉ की पढ़ाई कर रही थी. संतोष खुद भी लॉ स्टूडेंट था.

हाई कोर्ट के फैसले को संतोष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और उच्चतम न्यायालय ने 29 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

मुकदमा चलने के बाद तीन दिसंबर, 1999 को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने उसे बरी कर दिया. लेकिन बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट गया, जहां 27 अक्तूबर, 2006 को उसे फांसी की सजा सुनाई गई.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट ने सबूतों के मद्देनजर उसे मौत की सजा सुनाई है और इसे बरकरार रखा जाना चाहिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे जीवनदान दे दिया.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः आभा एम